वाराणसी। मिर्जामुराद क्षेत्र के कल्लीपुर गांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित पांच दिवसीय सब्जी नर्सरी तकनीक प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को संपन्न हुआ। इस दौरान किसानों को सब्जी नर्सरी उत्पादन के टिप्स दिए गए। ताकि स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक़ एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने केंद्र पर चल रहे आर्या योजना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस स्कीम के तहत किसानो को सब्जी नर्सरी उत्पादन पर प्रशिक्षण देकर उन्हें रोज़गार से जोड़ना है। कार्यक्रम मे केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक़ डॉ. मनीष पाण्डेय ने कहा कि सब्जी नर्सरी उत्पादन करते समय सही जगह का चुनाव कैसे करें। मृदा उचार मे थीरम या कैपटान 5 ग्राम/मी.2 की दर से मृदा मे मिलए, बीज उपचार के लिए थीरम, कैपटान या करबेंदाज़िम 2.5 से 3 ग्राम/ किलो बीज कि दर से उपचारित करने से सब्जी नर्सरी को रोगों से बचाय जा सकता है। बीज बुआई के लिए औसतन बीज के आकार का 2 से 3 गुना गहरायी पर बोना चाहिए। बीज बोने के बाद पुआल से अचदान कर हजरे से हल्का हल्का पानी सुबह साम दे, 4 से 5 दिन बाद बीज जमाव के बाद अछदन को नर्सरी बेड से हटा दे, सब्जी नर्सरी डालने के 25-28 दिन बाद रोपड़ के लिए तैयार हो जाती है कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. श्रीप्रकाश सिंह, डॉ. राहुल, डॉ. अमिटेश, डॉ. प्रतीक्षा सहित प्रक्षेत्र प्रबंधक राणा पीयूष ने भी सब्जी नर्सरी उत्पादन पर अपने अनुभवों को किसानो के समक्ष साझा किया। प्रशिक्षण में दर्जनों की संख्या में किसान शामिल हुए।

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