– कथाव्यास ने श्रीरामकथा के प्रसंगों का वर्णन कर बहाई भक्ति की धारा
– मोहनपुरवा स्थित छिवलहाधाम मंदिर में आयोजित हो रही श्रीराम कथा

बांदा। महोबा रोड में मोहनपुरवा गांव स्थित छिवलहाधाम मंदिर में नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ और श्रीराम कथा के सातवें दिन कथा व्यास ने राम वनगमन व केवट प्रसंग का वर्णन किया। रामकथा में मार्मिक प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा व्यास ने कहा कि भगवान राम मर्यादा स्थापित करने को मानव शरीर में अवतरित हुए हैं। छिवलहाधाम मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा व विष्णु महायज्ञ के सातवें दिन शुक्रवार को कथा व्यास पं. जगप्रसाद तिवारी (महोबा) ने राम वनगमन और केवट प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम मर्यादा स्थापित करने को मानव शरीर में अवतरित हुए। पिता की आज्ञा पर वह वन चले गए। भगवान राम वन जाने के लिए गंगा घाट पर खड़े होकर केवट से नाव लाने को कहते हैं, लेकिन केवट मना कर देता है और पहले पैर पखारने की बात कहता है। केवट भगवान का पैर धुले बगैर नाव में बैठाने को तैयार नहीं होता है। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्श समाज में आज भी कायम है। भगवान प्रेम भाव देने वाले का हमेशा कल्याण करते हैं। कहा कि भरत ने भगवान राम के वनवास जाने के बाद खड़ाऊं को सिर पर रखकर राजभोग की बजाय तपस्या की। कहा कि जीवन में भक्ति और उपासना का अलग महत्व है। निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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