1. बांदा

जिले में अपर जिलाधिकारी (एडीएम) राजेश वर्मा और अस्पताल संचालक अरुणेश पटेल की सजातीय साठगांठ ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी हैं। एक प्रेस वार्ता में अरुणेश पटेल ने न केवल एडीएम की पत्नी की अपने डायग्नोस्टिक सेंटर में 30% हिस्सेदारी की बात स्वीकारी, बल्कि अनजाने में कई गंभीर खुलासे कर डाले, जिसने दोनों को और गहरे संकट में डाल दिया। इस प्रेस वार्ता ने न सिर्फ पार्टनरशिप की खबर पर मोहर लगाई, बल्कि एक वायरल तस्वीर में एडीएम के हाथ में शराब की बोतल के रहस्य को भी उजागर कर दिया। यह पूरा मामला भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और अवैध गतिविधियों का घिनौना खेल उजागर करता है।

*पार्टनरशिप का काला सच*

अरुणेश पटेल ने प्रेस वार्ता में खुलासा किया कि एडीएम राजेश वर्मा की पत्नी, डॉ. संगीता पटेल, उनके डायग्नोस्टिक सेंटर, शिवकृष्ण डायग्नोस्टिक सेंटर, में 30% हिस्सेदार हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके खाते में एडीएम की पत्नी से 3,60,000 रुपये आए, जिसका उन्होंने सबूत भी पेश किया। लेकिन इस खुलासे ने एक गंभीर सवाल खड़ा किया: एक अधिकारी की पत्नी उस जिले में व्यावसायिक गतिविधि कैसे संचालित कर सकती है, जहां उनका पति पदस्थ है? यह स्पष्ट रूप से सत्ता के दुरुपयोग और हितों के टकराव का मामला है, जो सेवा नियमों का उल्लंघन करता है।

*बोतल वाली तस्वीर का चौंकाने वाला राज*

सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर, जिसमें एडीएम राजेश वर्मा शराब की बोतल हाथ में लिए नजर आए, ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। इस पर सफाई देते हुए अरुणेश पटेल ने कहा कि एडीएम “शराब का ब्रांड पूछ रहे थे” और वे इसे पी नहीं रहे थे। लेकिन यह बचकाना तर्क और सवाल खड़े करता है—जब एडीएम शराब पीते ही नहीं, तो बोतल हाथ में लेकर ब्रांड क्यों पूछ रहे थे? इस लचर सफाई ने न केवल उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, बल्कि प्रशासनिक गरिमा को भी ठेस पहुंचाई।

*सजातीय रिश्ते या पुराने दोस्ती का ढोंग?*

अरुणेश पटेल ने सजातीय रिश्ते के आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया कि वे और एडीएम राजेश वर्मा पुराने क्लासमेट और घनिष्ठ मित्र हैं। लेकिन जब उनसे पुरानी तस्वीरों या सबूतों की मांग की गई, तो वे कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। सूत्रों का दावा है कि यह रिश्ता 2022 में एडीएम की बांदा में पोस्टिंग के बाद ही बना, न कि कोई पुरानी दोस्ती। यह सवाल भी उठा कि अगर यह रिश्ता इतना घनिष्ठ है, तो कैसे माना जाए कि एडीएम ने अरुणेश के अवैध अस्पताल को संरक्षण नहीं दिया?

*अवैध अस्पताल का संचालन और सीज का खेल*

शिवकृष्ण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, जो मेडिकल कॉलेज रोड पर ग्रीन बेल्ट की जमीन पर बिना नक्शे के बनाया गया, को तत्कालीन डीएम अमित सिंह बंसल ने सील करवाया था। लेकिन अरुणेश पटेल ने दावा किया कि उन्होंने कमिश्नर कोर्ट से सीज हटवाया, हालांकि इसके लिए कोई सबूत पेश नहीं किया गया। सवाल यह है कि बिना नक्शे और बिना रजिस्ट्रेशन के यह अस्पताल इतने वर्षों तक कैसे संचालित होता रहा? हाल ही में इसका रजिस्ट्रेशन सीएम कार्यालय में कराया गया, जो अपने आप में संदेहास्पद है।

*एसडीएम रजत वर्मा का कनेक्शन*

प्रेस वार्ता में जब एसडीएम रजत वर्मा के साथ संबंधों पर सवाल उठा, तो अरुणेश ने कहा कि उनके बच्चे का जन्म उनके अस्पताल में हुआ था, जिसके बाद रिश्ते बने। लेकिन यह जवाब और सवाल खड़े करता है—क्या वे हर मरीज या उनके परिजनों से ऐसे रिश्ते बना लेते हैं? यह स्पष्ट करता है कि यह रिश्ता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संरक्षण और साठगांठ का हिस्सा हो सकता है।

*भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज*

जदयू नेत्री शालिनी पटेल ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच और एडीएम को हटाने की मांग की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की नींव से जुड़ा हितों का टकराव बताया, जो प्रशासनिक मर्यादा को चुनौती देता है। शालिनी ने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो जदयू प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।

*सत्ता का दुरुपयोग और जनता का विश्वास टूटा*

यह प्रेस वार्ता, जो एडीएम को बचाने के लिए बुलाई गई थी, उल्टे उनके लिए गले की हड्डी बन गई। अरुणेश पटेल ने अपने बयानों से न केवल पार्टनरशिप और अवैध गतिविधियों की पुष्टि की, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गहरे नेटवर्क को भी उजागर कर दिया। बांदा की जनता अब सवाल उठा रही है कि आखिर कब तक ऐसे अधिकारी और उनके संरक्षित कारोबारी नियम-कानूनों को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार का खेल खेलते रहेंगे? इस मामले में उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।

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