रायबरेली, 29 नवंबर 2023

 

जनपद में 21 नवंबर से 4 दिसंबर तक पुरुष नसबंदी पखवारा चल रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वीरेंद्र सिंह ने अपने कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर जागरूकता वाहन, “सारथी वाहन” को रवाना किया।

इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि इस वाहन पर चस्पा परिवार नियोजन के साधनों की जानकारी के साथ माईकिंग के माध्यम से लोगों को पुरुष नसबंदी के साथ अन्य साधनों की जानकारी भी दी जाएगी। यह जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करेगा। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन केवल महिला की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि पुरुषों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। एनएसवी महिला नसबंदी की अपेक्षा बहुत ही आसान विधि है।

इस अवसर पर परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राधा कृष्ण ने बताया कि एनएसवी पखवाड़े का आयोजन दो चरणों में 21 नवम्बर से चार दिसम्बर के मध्य किया जा रहा है। पहला चरण, मोबिलाइजेशन फेज 21 से 27 नवंबर तक चला जिसमें एएनएम और आशा कार्यकर्ता द्वारा पुरुष गर्भनिरोधक साधनों के प्रयोग के लिए इच्छुक दंपत्तियों की पहचान की गई एवं पुरुष लाभार्थियों को एनएसवी के लाभ बताते हुए इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

उन्होंने बताया कि मंगलवार से द्वितीय चरण यानि सेवा प्रदायगी फेज शुरू हुआ है जो कि चार दिसंबर तक चलेगा । इस दौरान पुरुषों की भागीदारी से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभियान के दौरान पोस्टर, बैनर, पेटिंग के माध्यम से जागरूक किया जाएगा।

नियत सेवा दिवसों (एफडीएस) के माध्यम से एनएसवी की प्रक्रिया की जाएगी।

इस साल इस अभियान की थीम है “स्वस्थ मां, स्वस्थ बच्चा, जब पति का हो परिवार नियोजन में योगदान अच्छा।

नोडल अधिकारी ने बताया कि एनएसवी विधि के द्वारा किए जाने वाली पुरुष नसबंदी में न तो चीरा लगता है, न टांका लगता है और न ही पुरुष की पौरुष क्षमता में कमी या कमजोरी होती है। यह सरल ऑपरेशन मात्र 10 मिनट में हो जाता है। ऑपरेशन के एक घंटे बाद आदमी घर जा सकता है और 72 घंटे बाद व्यक्ति अपना रोजमर्रा का कामकाज आम दिनों की तरह कर सकता है। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन के लिए पुरुषों को ही आगे आना चाहिए, क्योंकि पुरुषों की शारीरिक संरचना महिलाओं की अपेक्षा अधिक सरल होती है। जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डी एस अस्थाना बताते हैं

पुरुष नसबंदी करवाने वाले व्यक्ति की उम्र 60 साल से कम होनी चाहिए। व्यक्ति शादीशुदा होना चाहिए और एक बच्चा होना जरूरी है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि भी अधिक रखी गई है। नसबंदी करवाने पर पुरुष लाभार्थी को 3,000 रुपया मिलता है वहीं प्रेरक को प्रति लाभार्थी 400 रुपया मिलता है। वहीं महिला लाभार्थी को 2,000 रुपया और प्रेरक को 300 रुपया की प्रोत्साहन राशि मिलती है। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक राकेश प्रताप सिंह, जिला परामर्शदाता परिवार कल्याण हिमांशु श्रीवास्तव, प्रभास कुमार आदि उपस्थित रहे।

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