तिंदवारी कस्बे के गांधी नगर में हुआ आयोजन
तिंदवारी (बांदा)। कस्बे के गांधीनगर में आयोजित संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन कथा व्यास ने सुदामा चरित्र की कथा के माध्यम से मित्रता की मिसाल प्रस्तुत करते हुए सामाजिक समानता का संदेश दिया। वहीं श्रोताओं को बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का 7 दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है।
गांधीनगर स्थित प्राचीन शिव मंदिर प्रांगण में तिवारी परिवार की ओर से चल रही श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन कथा स्थल में श्रोता, भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास आचार्य रजनीश कृष्ण महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा का समापन करते हुए भक्तों को कई प्रसंगों का श्रवण कराया। जिसमें प्रभु श्री कृष्ण के 16108 विवाहों के प्रसंग के साथ, सुदामा चरित्र तथा परीक्षित मोक्ष की कथा सुनायी। इन कथाओं को सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने सभी भक्तों से धर्म की ओर अग्रसर होकर भागवत को अपने जीवन में उतरने को कहा। कथा व्यास ने कहा कि द्वारपाल ने द्वारकाधीश से जाकर कहा प्रभु द्वार पर एक ब्राह्मण आया है और आपसे मिलना चाहता है। वह अपना नाम सुदामा बता रहा है। यह सुनते ही द्वारकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने राजमहल के द्वार पर पहुंच गए। सुदामा जी ने भगवान के पास जाकर भी कुछ नहीं मांगा। भगवान श्री कृष्णा अपने स्तर से सुदामा को सब कुछ देते हैं। उन्होंने कथा के माध्यम से यह भी बताया कि सुदामा चरित्र जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि संसार में मनुष्य को सदा अच्छे कर्म करने चाहिए तभी उसका कल्याण संभव है। संस्कार ही मनुष्य को महानता की ओर ले जाते हैं। श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष के प्राप्ति संभव है। अहंकार मनुष्य में ईर्ष्या पैदा कर अंधकार की ओर ले जाता है।इस अवसर पर कथा परीक्षित के रूप में श्रीमती सावित्री तिवारी एवं रामराज तिवारी, राजाराम तिवारी, भाजपा नेता आनंद स्वरूप द्विवेदी, इंद्रेश कुमार तिवारी, प्रमोद कुमार तिवारी, विनोद कुमार तिवारी, दीपू सोनी,कुलदीप तिवारी, दुर्गेश तिवारी आदि बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे।