– मंडलायुक्त को गुमराह कर करोड़ों का खेल खेला जा रहा है
– 84 लाख रुपये की अनुमानित राशि को शासन से मंजूरी लिए बगैर, टुकड़ों टुकडों में जिला स्तर पर पास करवाकर लूट लिया गया
बांदा (उ०प्र०)-जनपद का पंचायती राज विभाग आज भ्रष्टाचार की दलदल में इतना गहरा धंस चुका है कि मोदी-योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की पोल खुलकर सामने आ गई है। सरकारें दावा करती हैं कि उनके शासन में भ्रष्टाचार का नामोनिशान नहीं, लेकिन यहां के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी खुद इन दावों को झुठलाते हुए, करोड़ों के घोटालों की साजिश रच रहे हैं। पंचायती राज विभाग के मंडलीय उपनिदेशक (पंचायती) परवेज आलम खां, जो एक हादसे में दिव्यांग हुए, अब पूरे विभाग को ही ‘दिव्यांग’ बनाने पर तुले हैं—हर कोने में लूट का जाल बिछाकर। ट्रेनिंग कैंपों से लेकर सफाई कर्मचारियों तक, कहीं भी शासन के नियमों की परवाह नहीं; सिर्फ व्यक्तिगत लाभ की लूटमारी।
इस घिनौने घोटाले की परतें खुल रही हैं, जहां ट्रेनिंग और प्रशिक्षण कैंपों के खर्च में 84 लाख रुपये की अनुमानित राशि को शासन से मंजूरी लिए बगैर, टुकड़ों में जिला स्तर पर पास करवाकर लूट लिया गया। कूटरचित दस्तावेजों से अधिकारियों ने अपने चहेतों को फायदा पहुंचाया और खुद मालामाल हुए। भाजपा नेता बालकृष्ण पांडेय ने शासन को पत्र भेजकर सख्त कार्रवाई की मांग की है, जबकि स्थानीय लोग इस अधिकारी को जिले का ‘कलंक’ बताते हुए सांसदों-विधायकों की चुप्पी पर आगबबूला हैं। क्या ये जनप्रतिनिधि भी इस भ्रष्टाचार के साझीदार हैं?
विभाग में छह सफाई कर्मचारी तैनात हैं—तीन कार्यालय में और तीन फील्ड में—लेकिन एक कर्मचारी तो लिपिक का काम भी संभाल रहा है, जो पूरी तरह असंवैधानिक है। प्रयागराज में इसी तरह के मामले में डीपीआरओ आलोक सिन्हा को सितंबर 2024 में उत्तर प्रदेश शासन ने निलंबित कर दिया था, लेकिन बांदा में नियमों को ठेंगा दिखाते हुए वित्तीय अनियमितताएं जारी हैं। अधिकारी की पत्नी और पुत्र के बैंक खातों की जांच हो, तो करोड़ों का घोटाला उजागर हो जाएगा! रसीदें दिखाकर बिना जीएसटी के बिलों का भुगतान, सब कुछ गुमराह करने की साजिश।
जब हमने चित्रकूट धाम मंडल के मंडलीय उपनिदेशक (पंचायती) परवेज आलम खां से उनके कार्यालय में पत्रकार अरविंद श्रीवास्तव के साथ मुलाकात की, तो उन्होंने सभी आरोपों को ‘निराधार’ और ‘राजनीतिक साजिश’ बताकर टाल दिया। चित्रकूट जिले के  पहाड़ी मानिकपुर ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षणार्थियों को भोजन की गुणवत्ता पर वापस भेजने के आरोप को भी खारिज किया, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं दिखाया। रट्टा-रटाया जवाब: “यह मुझे बदनाम करने की चाल है।” लेकिन सच्चाई छिप नहीं सकती!  चित्रकूट धाम मंडल बांदा के मंडलायुक्त को गुमराह कर करोड़ों का खेल खेला जा रहा है।
यह भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं: सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी ग्रामीण इलाकों में होनी चाहिए, लेकिन इन्हें अधिकारियों की निजी सेवा में लगा दिया जाता है। सवाल उठता है—इनका वेतन ग्राम सभा के खाते से आता है या विभाग से? ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई प्रभावित हो रही है, स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ रही हैं। जिलाधिकारी और मंडल आयुक्त चित्रकूट धाम कैंप बांदा की चुप्पी शर्मनाक है—क्या वे भी इस लूट में शामिल हैं?
यह सिर्फ एक विभाग की कहानी नहीं, पूरे सिस्टम की सड़ांध है। हमारी मुहिम जारी रहेगी—हर परत खोल कर, हर दोषी को बेनकाब करेगे । सरकार अगर वाकई जीरो टॉलरेंस पर है, तो तुरंत जांच बिठाए, निलंबन करे और करोड़ों की वसूली करे। अन्यथा, जनता का विश्वास टूटेगा, और भ्रष्टाचार का यह काला साम्राज्य और मजबूत होगा।

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