– शासनादेशों को दरकिनार कर पम्प चालकों को दी जा रही मात्र 4350 रूपये मजदूरी
बांदा। देश की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार गरीबों और मजदूरों के हितों में चाहे जितनी भी योजनाएं चला ले। लेकिन इन दोनों सारकारों का कोई भी आदेश जलसंस्थान में लागू नहीं होता। चित्रकूट धाम मण्डल जल संस्थान में आज भी आजादी के पहले की गुलामी मानसिकता के अधिकारियों की गुलामी की जंजीरे जलसंस्थान के संचालन प्रथा में कार्य करने वाले पम्प आपरेटरों को जकड़ कर रखी हैं। इस भीषण महंगाई में जहां सरकार की ओर से आउट सोर्स कर्मचारियों का मानदेय कम से 18 हजार रूपये प्रतिमाह कर दिया गया है तो वहीं दूसरी ओर जलसंस्थान में संचालन प्रथा पर कार्य करने वाले पम्प चालकों को मात्र 4350 रूपये मजदूरी प्रतिमाह दी जा रही है। इतने कम मानदेय संचालन कर्मचारियों को रोटी के भी लाले पड़े हैं।
जलसंस्थान के एक संचालन कर्मचारियों के यूनियन से जुड़े एक नेता ने बताया कि इतनी कम मजदूरी में उनको अपने परिवार का भरण पोषण करना बहुत मुश्किल होता है। यदि इस बात के लिए अधिकारियों से कहो तो उनको कार्य से हटाने की धमकी देकर उनको शांत करा दिया जाता है। कई बार अधिकारियों से बावत गुहार लगाने के बाद भी उनके मानदेय में किसी भी प्रकार की कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गयी। वहीं उन्होंने बताया कि कई कर्मचारी तो इस भीषण महंगाई में बीमार होने पर इतने कम पैसों में इलाज न करा पाने के कारण जिंदगी की जंग भी हार चुके हैं। लेकिन जलसंस्थान के अधिकारियों के माथे पर कोई सिकन नहीं आती। यदि उच्चाधिकारियों से वेतन को बढ़ाने के लिए कहा जाता है तो उनको डरा-धमका कर या तो शांत करा दिया जाता है या फिर उनको कार्य से ही हटा दिया जाता है।
बांदा। देश की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार गरीबों और मजदूरों के हितों में चाहे जितनी भी योजनाएं चला ले। लेकिन इन दोनों सारकारों का कोई भी आदेश जलसंस्थान में लागू नहीं होता। चित्रकूट धाम मण्डल जल संस्थान में आज भी आजादी के पहले की गुलामी मानसिकता के अधिकारियों की गुलामी की जंजीरे जलसंस्थान के संचालन प्रथा में कार्य करने वाले पम्प आपरेटरों को जकड़ कर रखी हैं। इस भीषण महंगाई में जहां सरकार की ओर से आउट सोर्स कर्मचारियों का मानदेय कम से 18 हजार रूपये प्रतिमाह कर दिया गया है तो वहीं दूसरी ओर जलसंस्थान में संचालन प्रथा पर कार्य करने वाले पम्प चालकों को मात्र 4350 रूपये मजदूरी प्रतिमाह दी जा रही है। इतने कम मानदेय संचालन कर्मचारियों को रोटी के भी लाले पड़े हैं।
जलसंस्थान के एक संचालन कर्मचारियों के यूनियन से जुड़े एक नेता ने बताया कि इतनी कम मजदूरी में उनको अपने परिवार का भरण पोषण करना बहुत मुश्किल होता है। यदि इस बात के लिए अधिकारियों से कहो तो उनको कार्य से हटाने की धमकी देकर उनको शांत करा दिया जाता है। कई बार अधिकारियों से बावत गुहार लगाने के बाद भी उनके मानदेय में किसी भी प्रकार की कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गयी। वहीं उन्होंने बताया कि कई कर्मचारी तो इस भीषण महंगाई में बीमार होने पर इतने कम पैसों में इलाज न करा पाने के कारण जिंदगी की जंग भी हार चुके हैं। लेकिन जलसंस्थान के अधिकारियों के माथे पर कोई सिकन नहीं आती। यदि उच्चाधिकारियों से वेतन को बढ़ाने के लिए कहा जाता है तो उनको डरा-धमका कर या तो शांत करा दिया जाता है या फिर उनको कार्य से ही हटा दिया जाता है।