वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में बुधवार को मानस पत्रिका परिवार की ओर से ‘मानस’ पत्रिका के बहुभाषी अंक का लोकार्पण सह परिचर्चा का आयोजन भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के राहुल सभागर में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पत्रिका द्वारा कई युवा रचनाकारों को सम्मानित भी किया गया इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए न्यूरो चिकित्सक प्रो. विजयनाथ मिश्र ने कहा कि मानस एक नवाचारी पत्रिका है।इसने नई संभावनाओं की तलाश की है। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि मानस पत्रिका का मूल स्वर संवाद है। यह नई रचनाशीलता का एक यादगार मंच है। ज्ञान के लोकतंत्रीकरण व वैचारिक स्वाधीनता के लिए पत्रिका का यह बहुभाषी अंक ऐतिहासिक है भौतिकी विभाग, बीएचयू के डॉ. देवेंद्र मिश्र ने कहा कि साहित्य अभ्यास का विषय है। इसलिए युवाओं को सतत अभ्यास करते रहना चाहिए। संस्कृत विभाग, बीएचयू के शिक्षक डॉ. राजेश सरकार ने कहा कि विविधताओं से भरा मानस का यह विशेषांक विशेष महत्व है। डॉ. सपना भूषण ने कहा कि भारतीय भाषाओं की शिनाख्त करती यह पत्रिका बहुत महत्वपूर्ण है। हिंदी विभाग, बीएचयू के शिक्षक डॉ. प्रभात कुमार मिश्र ने कहा कि मानस युवा रचनाशीलता के लिए रचनात्मक संबल है। यह हमारी सामूहिक रचनाशीलता को संरक्षित करने का माध्यम है दूसरे सत्र में प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल की अध्यक्षता में बहुभाषी कविता पाठ हुआ। जिसमें मनकामना शुक्ल पथिक, गोलेन्द्र पटेल, वैभव लक्ष्मी, श्रेयांश सिंह, प्रीति पांडेय, सौम्या मिश्रा, नीलम गुप्ता, ज्योति, सुप्रिया ओझा, बालेंदु मिश्र, आकृति अर्पण, ऋचा गौड़, मेधा चांद्रायण, पियूष यादव, विकास सुनौडिया ने कविताएं पढ़ीं।स्वागत वक्त्तव्य मानस पत्रिका के संपादक आर्यपुत्र दीपक ने दिया। मानस मिश्र ने वार्षिक प्रगति विवरण प्रस्तुत किया। संचालन प्रीति कुमारी, ऋचा गौण व उदय पाल ने संयुक्त रूप से किया। धन्यवाद ज्ञापन सर्वेश कुमार ने दिया।