वाराणसी। शारदीय नवरात्र का आज छठवां दिन है। इस दिन आदि शक्ति के कात्यायनी स्वरूप से दर्शन-पूजन का विधान है। ऐसे में वाराणसी के सिंधिया घाट स्थित माता के प्राचीन मंदिर में भक्तों की लाइन भोर से ही लगी है। मान्यता है कि माता के दर्शन-पूजन से कन्याओं के विवाह की बाधा दूर होती है।
नवरात्रि की षष्ठी तिथि को माता के दर्शन मात्र से कुंवारी कन्याओं की विवाह बाधा दूर हो जाती है और उन्हें मनचाहा वर मिलता है। मान्यता है कि यदि माता को 7 मंगलवार दही-हल्दी लगाया जाए तो विवाह बाधा अवश्य ही दूर हो जाती है। मां पापों का नाश करती हैं। मां का यह रूप आत्मज्ञान प्रदान करता है। मां का भव्य मंदिर काशी के अलावा वृन्दावन में स्थित है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने कात्यायनी व्रत रखा था।
मां कात्यायनी ने देवताओं की प्रार्थना सुनकर महिषासुर से युद्ध किया। महिसासुर से युद्ध करते हुए मां जब थक गईं, तब उन्होंने शहद युक्त पान खाया। शहद युक्त पान खाने से मां कात्यायनी की थकान दूर हो गयी और महिषासुर का वध कर दिया। ऐसे में माता को प्रसन्न करने के लिए शहद युक्त पान भी अर्पित किया जाता है।