जलसा सीरातुन्नबी का आयोजन
बांदा। एक जलसा ए सीरातुन्नबी सल्लाहो अलैहे वसल्लम का आयोजन किया गया। जिसमे सैय्यद आबिद रब्बानी साहब ने फ़रमाया गौस ए आज़म मादर ज़ात वली है जो अपनी मां के पेट में 17 पारो का हाफिज हो जो बचपन के आलम में बच्चे को अपने हुक्म से ज़िंदगी अता करे जो हक़ बात बोलकर डाकुओं को वली बना दे जिनके बयान के दौरान लोग दीदारे मुस्तफा मांगे तो दीदारे मुस्तफा अता हो जाए जिनका क़दम तमाम औलिया की गर्दनो पे है उसी ज़ात को हम गौस ए आज़म अब्दुल कादिर जिलानी कहते है। मौलाना सैय्यद वाजिद रब्बानी साहब ने फरमाया इंसान को चाहिए कि वो हर हाल मे अल्लाह का शुक्र अदा करे। अल्लाह ने हमको खूबसूरत बनाया, आंखे अता की, ज़बान दी, हाथ दिए, पैर दिए, दिल दिया, दिमाग़ दिया, गुर्दे दिये, घर दिया इज़्ज़त दी, दौलत दी,शोहरत दी, मां बाप जैसी नेमत अता की हम जिस क़दर भी अल्लाह का शुक्र अदा करे वो कम है इसलिए तुम अल्लाह का शुक्र अदा करो अल्लाह तुम्हे नेमतों से नवाज़ता रहेगा। इस दौरान सैय्यद आदिल मसूदी, सैय्यद फ़ैजान रब्बानी ने खूबसूरत नातो मनक़बत पेश किए। प्रोग्राम में आए सभी लोगों ने जलसे को खूब पसन्द किया। शोबा ए तबलीग और कमेटी के लोगों ने जलसे को सजाया। इस मौके पर मौलवी शाकिर आलम नफीस शाह, अनीस शाह, हैदर अली, लाला, गुलाम जीलानी, शकील, मुन्ना, मुबीन आदि शामिल रहे।