– पुरातत्व विभाग ने साधी चुप्पी और न ही दे रहा है रखरखाव का ध्यान
बांदा। कालिंजर दुर्ग ऐतिहासिक धरोहर तो है ही लेकिन पौराणिक स्थल के रूप में भी जाना जाता है जिसमें कालिंजर दुर्ग बहुत से महल बने हुए हैं जिसमें मोती महल के सामने लगा डैशबोर्ड भी टूट गया। कालिंजर दुर्ग भारतीय पुरातत्व विभाग सर्वेक्षण के अधीन है जिसमें सुरक्षा के लिए भारतीय पुरातत्व विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है सभी स्मारकों की देखभाल एवं सुरक्षा का जिम्मा भारतीय पुरातत्व विभाग के द्वारा किया जाता है लेकिन इसके बावजूद भी ऐतिहासिक धरोहर जिसे देखने दूर-दूर से देशी एवं विदेशी सैलानी कालिंजर दुर्ग आते हैं जिसमें सभी स्मारकों के सामने डैशबोर्ड लगे हुए हैं जिसमें मोती महल के सामने वाला डैशबोर्ड भी टूट गया है पूर्व में रंग महल के सामने वाला भी डैशबोर्ड टूट चुका है वहीं बेन्कट बिहारी महल के सामने वाला डैशबोर्ड भी टूट चुका है भारतीय पुरातत्व विभाग की घोर लापरवाही एवं उदासीनता के चलते आए दिन डैशबोर्ड तोड़े जा रहे हैं पूर्व में कालिंजर दुर्ग में एक मूर्ति भी खंडित कर दी गई थी पुरातत्व विभाग के कर्मचारी आंख कान बंद कर ड्यूटी कर रहे हैं यदि यही हाल रहा तो धीरे-धीरे दुर्ग को भी क्षति पहुंच सकती है कालिंजर दुर्ग में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से सत्येंद्र कुमार संरक्षण सहायक के पद पर तैनात हैं जिस पर उन्हें फोन लगाया गया तो फोन नहीं उठा । इधर ऐतिहासिक धरोहर के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात पर ऐतिहासिक दुर्ग कालिंजर का उल्लेख किया था वहीं पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर कालिंजर दुर्ग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात पर उन्होंने भी पोस्ट किया गया था इसके बाद भी कलिंजर दुर्ग पर भारतीय पुरातत्व विभाग के जिम्मेदारान कर्मचारी लापरवाही के ऊपर लापरवाही करते चले जा रहे हैं यदि यही हाल रहा तो कालिंजर दुर्ग का अस्तित्व भी खतरे पर पड़ सकता है।