वाराणसी, 27 अगस्त। जी-20 देशों के संस्कृति मंत्रियों की चौथी एवं अंतिम बैठक में भाग लेने के बाद विदेशी मेहमानों ने रविवार को भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ का भ्रमण किया। प्रतिनिधियों ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को महसूस करने के साथ खंडहरों के पुरातात्विक अवशेष और म्यूजियम का अवलोकन किया। सारनाथ के पुरातात्विक अवशेषों को लेकर मेहमानों में काफी कौतूहल एवं उत्साह दिखा जी-20 के संस्कृति कार्य समूह और संस्कृति मंत्रियों की बैठक का शनिवार को समापन हुआ। रविवार को सारनाथ के भ्रमण पर निकले इन प्रतिनिधियों को गाइड ने म्यूजियम में रखे पुरातात्विक अवशेषों के महत्व के बारे में जानकारी दी। परिसर में अशोक का चतुर्मुख सिंह स्तम्भ, भगवान बुद्ध का मंदिर, चौखंडी स्तूप को मेहमान देर तक निहारते रहे प्रतिनिधियों के अलग-अलग समूहों के लिए अलग-अलग गाइड तैनात किए गए थे। प्रतिनिधि इस दौरान गाइड से जानकारी लेने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के हर स्थल को कैमरे में कैद भी करते रहे। धमेख स्तूप पर लगभग 2600 वर्ष पूर्व बनी कलाकृतियों को मेहमान अपलक निहारते रहे। मेहमानों को अशोक स्तंभ, धर्मराजिका स्तूप एवं धमेख स्तूप के साथ ही प्राचीन स्मारकों, भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष दिखाने के साथ ही उनको इतिहास से परिचित कराया गया अतिथियों को बताया गया कि सारनाथ प्रमुख बौद्ध एवं हिंदू तीर्थस्थल है। ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था, जिसे धर्म चक्र प्रवर्तन का नाम गया है और जो बौद्ध मत के प्रचार-प्रसार का आरंभ था। यह स्थान बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थों में से एक है सारनाथ में जी-20 देशों के संस्कृति मंत्रियों और प्रतिनिधियों के दौरे के मद्देनजर वहां सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। पुलिस आयुक्त के निर्देशन में एडिशनल सीपी (कानून-व्यवस्था) और एसीपी सारनाथ राजकुमार सिंह सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहे। मेहमानों के जाने के बाद अफसर सारनाथ से लौटे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *