वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के पास सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सैकड़ों की संख्या में पहुंचे विश्वविद्यालय के छात्र प्रदर्शन करने लगे। सोमवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय की तरफ से जारी शोध प्रवेश परीक्षा के बुलेटिन में खामियां बताते हुए विश्वविद्यालय के छात्र परीक्षा नियंत्रक कार्यालय पहुंचे। परीक्षा नियंत्रक के मिलने जा रहे छात्रों को गेट पर ही रोक दिया गया। जिसके बाद सुरक्षाकर्मी और छात्रों के बीच बहस शुरू हो गई। परीक्षा नियंत्रक के कार्यालय में जाने को लेकर छात्रों और प्रॉक्टोरियल के जवानों के बीच तीखी नोकझोक हुई। वहीं छात्र अपनी मांगों को लेकर परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ विश्वविद्यालय प्रशासन सहित कुलपति के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दिए छात्रों का आरोप है, कि शोध प्रवेश परीक्षा को लेकर विश्वविद्यालय की तरफ से जारी बुलेटिन में काफी खामियां है। छात्रों ने इसे षड्यंत्र बताते हुए आरोप लागया कि इन खामियों को दूर करने को लेकर कई बार छात्रों के द्वारा पत्रक दिया गया, लेकिन इसके बावजूद छात्रों की मांग को नजर अंदाज कर दिया गया। छात्रों ने चेतावनी दिया है, कि यदि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों की अनदेखी करेगा,तो वह बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे छात्रों ने विश्वविद्यालय की ओर से शोध प्रवेश परीक्षा का बुलेटिन जारी किए जाने के बाद कई सवाल परीक्षा नियंत्रक से पूछा। जिसमे मुख्य रूप से एजेंडा आइटम 6 में प्रस्तावित Ph.d प्रवेश प्रक्रिया में निम्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण के साथ इस प्रक्रिया को निरस्त या सुधार करने की मांग किया महोदय यह प्रस्ताव क्यों आया, इसका आधार क्या है, इसमें छात्रों के लिए क्या हित सोचे गये और किस प्रकार यह प्रक्रिया पारदर्शिता को बढ़ाएगी परसेंटाइल को मेरिट का आधार किस नियमावली से बनाया गया। परसेंटाइल को आधार बनाने से NET पास विद्यार्थी स्वाभाविक रूप से JRF से पिछड़ जाएंगे। साथ ही रिक्त सीट से ढाई गुना अधिक परीक्षार्थियों को बुलाने पर NET उत्तीर्ण विद्यार्थी प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। विशेषतः आर्ट्स, साइंस, सोशल साइंस और कॉमर्स के विद्यार्थी ज्यादा प्रभावित होंगे पूर्व में ऐसे विद्यार्थी जिनको परसेंटाइल प्राप्त नहीं है उन्हें किस आधार पर प्रक्रिया में सम्मलित किया जाएगा। UGC ने नौकरी देने के लिए जब परसेंटाइल को आधार नहीं माना है तो आपने परसेंटाइल को आधार क्यों बनाया M Value को प्रक्रिया से बाहर करने का क्या कारण है, क्या इससे स्नातक, परास्नातक के विद्यार्थियों का प्रदर्शन प्रभावित नहीं होगा। जिस विभाग में NET, JRF की संख्या अधिक है वहाँ साक्षात्कार को महत्व देने से प्रक्रिया में पक्षपात बढ़ने की संभावना को कैसे नियंत्रित किया जाएगा। जब वर्तमान समय में कार्यरत शिक्षकों द्वारा JRF की परीक्षा पास नहीं की गई है तो विद्यार्थियों के संदर्भ में इसे विशेषत JRF को आवश्यकता से अधिक महत्व देने की क्या आवश्यकता है।