क्रासरः बाराबंकी में तैनाती के दौरान जिला जज ने किया यौन उत्पीडन
का्रसरः हाईकोर्ट में शिकायत के बाद भी दोषी पर नहीं हुयी कार्यवाई
बांदाः प्रतिष्ठित पदों में बैठी महिलाओं को आम जनता भले ही सम्मानजनक निगाह से देखती हो, लेकिन उनके उपर बैठे अधिकारी उन्हें हिकारत की नजर से ही देखते है। वह उनके साथ गलत व्यवहार में भी पीछे नहीं हटते। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला जनपद से सामने आया है। जहां पर एक सिविल जज ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है।
जनपद में तैनात महिला सिविल जज अर्पिता साहू ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। उन्होंने भेजे पत्र में बताया कि बाराबंकी में तैनाती के दौरान जिला जज द्वारा उनके साथ शारीरिक और मानसिक प्रताडना की गयी। इतना ही नहीं उस दौरान जिला जज द्वारा उन पर रात के समय मिलने आदि का दबाब भी बनाया गया। सिविल जज ने जिला जज के खिलाफ हाईकोर्ट में शिकायत भी दर्ज करायी। लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुयी। जिससे निराश होकर उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से इच्छा मृत्यु की मांग की है।
सीजेआई को लिखे पत्र में पीडिता सिविल जज ने लिखा कि मैं इस पत्र को बेहद दर्द और निराशा में लिख रही हूं। इस पत्र का मेरी कहानी बताने और प्रार्थना करने के आलावा कोई और उददेश्य नहीं है। मेरे सबसे बडे अभिभावक सीजेआई आप मुझे अपना जीवन समाप्त करने की अनुमति दे। मै बहुत उत्साह और विश्वास के साथ न्यायिक सेवा में शामिल हुयी थी कि आम लोगों को न्याय दिलाउंगी। लेकिन मै यह नहीं जानती थी कि जिस कार्य के लिए जा रही हूं वहां पर जल्द ही मुझे न्याय का भिखारी बना दिया जायेगा। मेरी सेवा के थोडे से ही समय में मुझे खुली अदालत में दुर्व्यवहार का दुर्लभ सम्मान मिला है। मेरे साथ हद दर्जे तक यौन उत्पीडन किया गया है। मेरे साथ बिल्कुल कूडे जैसा व्यवहार किया गया है। मेरी दूसरों को न्याय दिलाने की आशा थी। लेकिन मुझे इसका क्या सिला मिला।
इनसेट
महिलाएं खिलौना बनना सीख लें
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजे पत्र में सिविल जज ने महिलाओं के लिए भी संदेश लिखा है। उन्होंने लिखा है कि मै भारत में काम करने वाली महिलाओं से कहना चाहूंगी कि वह यौन उत्पीडन के साथ जीना सीखें। यह हमारे जीवन का सत्य है। पाश अधिनियम, यह हमसे बोला गया एक बडा झूठ है। कोई सुनता नहीं, कोई परेशान नहीं करता। शिकायत करोगी तो प्रताडित किया जायेगा। अगर कोई महिला सोचती है कि आप सिस्टम के खिलाफ लडेगे तो मै आपकों बता दूं कि मैं ऐसा नहीं कर सकती। मै जज हूं, मै अपने लिए निष्पक्ष जांच तक नहीं कर सकी। चलों, न्याय क्लोज करें। मै सभी महिलाओं को सलाह देती हूं कि वे खिलौना या निर्जीव वस्तु बनना सीखें।