बांदा। सोशल मीडिया में आग की तरह फैली कौशांबी की घटना व पुलिस द्वारा किए गए सवर्ण समाज के लोगों पर बर्बर व्यवहार ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। क्या यही है माननीय मुख्यमंत्री की पुलिस बल का असली चेहरा जिसने पहले प्रधान के दबाव में बेटे को पाक्सो एक्ट लगाकर जेल भेजा पिता रामबाबू तिवारी इस आफिस से उस आफिस भटकता रहा जब न्याय नहीं मिला तब उसने अपने पेट पर सुसाइड नोट लिखकर जहर खा लिया व इस दुनिया का ही त्याग कर दिया इस घटना से आक्रोशित होकर जब परिजन व कुछ सवर्ण समाज के लोग शव रख कर प्रदर्शन कर रहे थे तभी लाठीचार्ज व सवर्ण के लोगों को गाली देना किस ओर इंगित करता है कहने का आशय है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाये तब न्याय की उम्मीद भी करें तो किससे। समाजसेवी सुमित शुक्ला ने मां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग करते हुए कहा कि कौशांबी की घटना कोई छोटी मोटी घटना या अचानक हुई घटना नहीं है बल्कि इसे रोका जा सकता था। अभी भी सरकार के पास समय है जल्द से जल्द अपनी निगरानी में जांच टीम गठित कर शुन्य से जांच करवा कर कार्यवाही करें तथा सवर्ण समाज के लोगों को दौड़ा दौड़ा कर पीटने वाले व गाली-गलौज करने वाले पुलिस कर्मियों के अपराध को अक्षम्य मानते हुए तत्काल संज्ञान ले तथा प्रदर्शन कर रहे लोगों के ऊपर दर्ज किया गया मुकद्दमा वापस ले क्योंकि सभी विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं अन्यथा आने वाले समय में यह घटना भाजपा व सरकार दोनों के लिए नुकसान देह हो सकती है।

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