बांदा। डिजिटल इंडिया के दावों के बीच बांदा के गुरेह गांव आज उस भारत की तस्वीर है जहां मोबाइल हाथ में है टावर गांव में खड़ा है लेकिन नेटवर्क नहीं नतीजा यह हुआ कि 6 माह से लगभग सैकड़ो लोग बांदा मुख्यालय में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर बसे इस गांव की आबादी 15000 से ज्यादा बताई जा रही है अधिकांश लोगों के पास मोबाइल फोन है लेकिन गांव में घुसते ही सिग्नल गायब हो जाता है कॉल करनी हो जरूरी सूचना लेनी हो किसी से इमरजेंसी में बात करनी हो तो ग्रामीणों को डेढ़ से 2 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है कई बार मोबाइल हाथ में होता है लेकिन कॉल नहीं लगती गांव में एयरटेल व जिओ का मोबाइल टावर भी लगा है लेकिन वह सिर्फ दिखता है चलता नहीं कभी-कभार सिग्नल आता है फिर पूरा दिन गायब रहता है इस अनिश्चिता मैं लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को ठप कर दिया है जिओ एयरटेल के रिटेलर राकेश साहू बताया कि नेटवर्क ना होने से बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई आनलाइन कक्षाएं नहीं चल पाती नौकरी की सूचनाये समय पर नहीं मिल पाती बैंक दफ्तरऔर बाहर गए परिजनों से संपर्क टूट जाता है कई बार बाहर गए सदस्य समय पर नहीं लौटे तो उससे बात नहीं हो पाती गांव वालों का कहना है क्षेत्र में 2जी व 4जी नेटवर्क चल रहा है नेटवर्क की जांच करवाई जाए।

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