वाराणसी के यूपी कॉलेज में बीएससी छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या के बाद शहर का माहौल सन्नाटे में डूब गया। रात 12.30 बजे हरिश्चंद्र घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन इस विदाई के पीछे एक पिता का टूटा हुआ दिल और अधूरी मांग थी। पिता ऋषि देव सिंह इस बात पर अड़े थे कि जब तक आरोपी का एनकाउंटर नहीं होगा, तब तक वह बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। पुलिस अधिकारियों ने काफी समझाने के बाद उन्हें मनाया। पोस्टमॉर्टम के बाद रात करीब 9 बजे शव को सीधे घाट ले जाया गया, जहां इंस्पेक्टर खुद एंबुलेंस में मौजूद रहे। कुछ छात्रों ने विरोध किया, लेकिन पुलिस ने लाठी फटकारकर रास्ता साफ कराया और अंततः पिता ने अपने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी।

कैमरे में कैद हुई बेरहम हत्या

शुक्रवार दोपहर करीब 11 बजे यूपी कॉलेज परिसर में जो हुआ, उसने हर किसी को झकझोर दिया। बीए सेकेंड ईयर के छात्र मंजीत सिंह चौहान ने बीएससी छात्र सूर्य प्रताप सिंह को गोली मार दी। घटना का वीडियो सामने आया, जिसमें सूर्य जमीन पर गिरा हुआ है और मंजीत उसके सीने पर चढ़कर गोली चला रहा है। यह सिर्फ हत्या नहीं थी, बल्कि एक खुलेआम चुनौती जैसा दृश्य था, जिसने कॉलेज परिसर की सुरक्षा और माहौल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

रैगिंग और वर्चस्व की लड़ाई बनी जानलेवा

दोनों छात्रों के बीच पिछले तीन महीनों से विवाद चल रहा था। एक तरफ सूर्य प्रताप पढ़ाई में होनहार और शांत स्वभाव का छात्र था, वहीं मंजीत का नाम पहले से ही दबंग और आपराधिक प्रवृत्ति के तौर पर जाना जाता था। शुक्रवार को प्रिंसिपल ने दोनों को बुलाकर समझाने की कोशिश की, लेकिन वहां भी बहस हो गई। इसी दौरान सूर्य ने मंजीत को देख लेने की बात कह दी, जो उसके लिए एक चुनौती बन गई। कुछ देर बाद मंजीत ने इस विवाद को खतरनाक अंजाम दे दिया।

हत्या की फिल्मी पटकथा, पिस्टल के साथ वापसी

प्रिंसिपल के कमरे से निकलने के बाद दोस्तों ने दोनों को अलग कर दिया था। मंजीत वहां से अपने घर गया और फिर एक साथी के साथ पिस्टल लेकर कॉलेज लौटा। उसने अपनी बाइक गेट के पास खड़ी की और कला संकाय के बरामदे में पहुंचकर सूर्य पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। सूर्य गिर पड़ा, लेकिन मंजीत यहीं नहीं रुका। वह उसके पास गया और सीने पर चढ़कर दोबारा गोली चलाई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

भागने की कोशिश और टूटा पैर

हत्या के बाद मंजीत ने भागने की कोशिश की। गेट से निकलने की बजाय वह छत से कूद गया। करीब 12 फीट की ऊंचाई से कूदने पर उसका एक पैर टूट गया, लेकिन इसके बावजूद वह भागता रहा। ई-रिक्शा से गिलट बाजार पहुंचा, फोन बंद किया और छिपने की कोशिश की। हालांकि चोट की वजह से वह ज्यादा दूर नहीं जा सका। पुलिस ने दबाव बनाकर देर रात उसे गिरफ्तार कर लिया और शिवपुर थाने में पूछताछ शुरू की गई।

‘माफिया’ इमेज और गैंग का लीडर

मंजीत सिंह चौहान का नाम पहले से ही इलाके में चर्चित था। वह ‘1818’ नाम से एक गैंग चलाता था और खुद को सोशल मीडिया पर ‘माफिया’ बताता था। बाइकर्स की इस गैंग में शामिल युवक अक्सर दबंगई के लिए जाने जाते थे। मंजीत की छवि एक मनबढ़ और हिंसक युवक की थी, जिस पर पहले भी मारपीट के मामले दर्ज थे।

पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर मातम

बीएचयू पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर का दृश्य बेहद मार्मिक था। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। पिता बार-बार जमीन पर बैठ जा रहे थे और लोगों के समझाने के बावजूद बेटे का चेहरा देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। काफी देर बाद उन्होंने आखिरी बार बेटे को देखा। लखनऊ से पहुंचे पिता ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा इस तरह उनसे छिन जाएगा। उनका कहना था कि अब उनका पूरा घर उजड़ गया।

गुस्से में छात्र, कैंपस में बवाल

हत्या के बाद कॉलेज परिसर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। कुर्सियां तोड़ी गईं, हंगामा हुआ और पथराव में तीन प्रोफेसर घायल हो गए। पुलिस ने करीब चार घंटे बाद हालात काबू में किए और घेरा बनाकर छात्रों व शिक्षकों को बाहर निकाला। इस दौरान पुलिस को लाठी फटकारनी पड़ी।

एक होनहार छात्र का अधूरा सपना

गाजीपुर निवासी सूर्य प्रताप सिंह बचपन से ही पढ़ाई में तेज था। आठवीं तक की पढ़ाई अपने जिले से करने के बाद वह यूपी कॉलेज में ही आगे की पढ़ाई कर रहा था। उसने 12वीं PCM से फर्स्ट डिवीजन में पास की और फिर बीएससी मैथ में दाखिला लिया। उसका सपना एमएससी करके रिसर्च करने और अकादमिक क्षेत्र में जाने का था। लेकिन एक पल की हिंसा ने उसके सारे सपनों को खत्म कर दिया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

सूर्य प्रताप के पिता लखनऊ में ट्रैवल एजेंसी में ड्राइवर हैं और मां एक स्कूल में सहायिका। परिवार में दो बहनें हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है। घर का इकलौता बेटा होने के कारण परिवार की उम्मीदें उसी पर टिकी थीं। महज 20 दिन पहले वह चेचक से उबरकर ठीक हुआ था और उसी दिन कॉलेज पहुंचा था, जिस दिन उसकी जिंदगी खत्म हो गई।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

पुलिस ने मुख्य आरोपी मंजीत चौहान को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसके साथी की तलाश जारी है। डीसीपी प्रमोद कुमार के अनुसार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है

काशी की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले संस्थानों में आखिर कब तक इस तरह की हिंसा होती रहेगी। एक परिवार का उजड़ा घर और एक अधूरा सपना अब इस सवाल का जवाब मांग रहा है।

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