क्रासरः जैविक खेती से मिलेगा मिट्टी व मनुष्य को पोषण
क्रासरः पाली हाउस के जरिए 45 दिन पहले तैयार होंगी सब्जियां
बांदा। बुंदेलखंड में खेती घाटे का सौदा हो गई है। ऐसे में जैविक खेती की बात करना बहुत मुश्किल है। श्रमिक भारती व सीएफएलआई द्वारा जनपद के बड़ोखर ब्लाक में महिला किसानों के साथ जैविक खेती पर ‘‘जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियां’’ परियोजना चल रही है। इसके तहत अलग-अलग चार गांवों में एक दिवसीय प्रशिक्षण कराया गया। तिंदवारा गांव स्थित सचिवालय में प्रशिक्षण का समापन हो गया।
शनिवार को अंतिम प्रशिक्षण में प्रशिक्षक जय नारायण सिंह ने लो टनल पाली हाउस विधि के बारे में बताया। कहा कि यह खेती की एक ऐसी विधि है, जिसमें किसान बे-मौसम सब्जियों की खेती कर सकते हैं। किसान लो-टनल पाली हाउस तकनीक से खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इस विधि का उपयोग करके 45 से 60 दिन पहले बाजार में सब्जी लाई जा सकती है। प्रशिक्षक रोहित श्रीवास्तव ने जैविक खादों और उसके उपयोग के बारे में विस्तार से चर्चा की। प्रशिक्षक रोहित श्रीवास्तव ने घर में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से तैयार होने वाली जैविक खादें जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, कंडा पानी, मट्ठा खाद इत्यादि बनाने की विधि बताई। उन्होंने कहा कि इस पद्धति से लगातार तीन साल खेती करने के बाद जैविक किसान होने का प्रमाण पत्र मिल जाता है। जैविक पद्धति से उगाई गई फसल की कीमत भी अधिक होती है।श्रमिक भारती के प्रोजेक्ट मैनेजर रविंद्र द्विवेदी (कानपुर) ने कहा कि खेतों में हो रहे रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी का पोषण नष्ट हो रहा है। इससे उगने वाली फसलों में धीरे-धीरे मिल रहा जहर खानपान के माध्यम से लोगों तक पहुंच रहा है। इसकी वजह से गंभीर बीमारियां घेर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को खेती में अहम योगदान होती है। इसलिए उनकी संस्था बुंदेलखंड में महिलाओं के साथ काम कर रही है।
कार्यक्रम समन्वयक इमरान अली ने बताया कि श्रमिक भारती द्वारा बुंदेलखंड में किसान समृद्धि के लिए परियोजना चलाई जा रही है। ज्यादा से ज्यादा महिला किसानों को इससे जोड़ने का काम किया जा रहा है। बड़ोखर ब्लाक के कुलकुम्हारी, कतरावल अरबई व तिंदवारा गांवों मंें जैविक खेती पर महिला किसानों का प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल सभी महिला किसानों का आभार व्यक्त किया।सीईओ मनोज यादव ने कहा कि खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बामदेव किसान उत्पादक संगठन बनाया गया है। उन्होंने संगठन से जुड़कर किसानों को मिलने वाले फायदे विस्तार से बताए। सीबीबीओ रामकरन यादव ने मचान पद्वति द्वारा किचन गार्डेन तैयार करने के बारे में बताया। इसमें तैयार सब्जी बड़ी व चकमदार होती है।इस मौके पर ग्राम प्रधान संतराम सिंह, पंचायत सहायक रोशनी सिंह, फील्ड कोआर्डिनेटर वेद प्रकाश व पूनम त्रिवेदी, आयुषी, किसान फूलप्यारी, लक्ष्मी देवी, जया तिवारी, शिल्लो देवी, ऊषा देवी, कमलेश देवी, गुड्डो, छंगी देवी, संदीप अवस्थी, मंगल सहित 50 महिला किसान शामिल रहीं।

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