बचपन को बेहतर बनाने और बच्चों को उनके अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का मंच देने वाले बढ़ते कदम संगठन ने आज अपना 23वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। यह अवसर न सिर्फ एक संगठन की वर्षगांठ है, बल्कि बच्चों के नेतृत्व, सहभागिता और सशक्तिकरण की एक लंबी और प्रेरणादायक यात्रा का उत्सव भी है।
9 जुलाई 2002 में 35 साहसी बच्चों द्वारा शुरू की गई यह पहल, आज दिल्ली हरयाणा , उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बढ़ते कदम न सिर्फ सड़क से जुड़े बच्चों की आवाज़ बन चुका है, बल्कि उन्होंने नीति निर्माण में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
संस्थापक सदस्यों और भागीदार संगठनों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने अपने अनुभव साझा किए, नुक्कड़ नाटक, चित्र प्रदर्शनी और गीतों के माध्यम से बाल अधिकारों का संदेश दिया।
बढ़ते कदम की सदस्या रीना (16 वर्ष) ने कहा:
“यह संगठन हमारे जैसे बच्चों को वह मंच देता है, जहां हम बोल सकते हैं, सवाल कर सकते हैं और बदलाव ला सकते हैं। आज हम सिर्फ मदद पाने वाले नहीं, बल्कि बदलाव के नेतृत्वकर्ता हैं।”
इस वर्ष के स्थापना दिवस की थीम थी: “बचपन बोलेगा – तो बदलाव होगा”
कार्यक्रम में भाग ले रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं और समुदाय के लोगो ने बच्चों की भागीदारी की सराहना की और इसे बाल अधिकारों की दिशा में मील का पत्थर बताया।
बढ़ते कदम संगठन आने वाले समय में और अधिक राज्यों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और बच्चों के मुद्दों पर राष्ट्रीय संवाद स्थापित करने का लक्ष्य रखता है।