तेंदुए का कहर जारी 48 घंटे में तीन हमले, गुरुवार को ली मासूम की जान,शनिवार रात घर से उठाया बकरा।

जनपद लखीमपुर खीरी जिले की वन रेंज बेलरायां क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत बैरिया और आसपास के गांवों में तेंदुए के पदचिन्ह लगातार देखे जा रहे हैं। तेंदुए का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। बीते 48 घंटों में तेंदुए ने तीन हमले कर पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। वन विभाग द्वारा लगाया गया पिंजरा अब तक खाली पड़ा है। शनिवार रात घर में घुसा तेंदुआ, आठ किलो का बकरा ले गया शनिवार रात्रि लगभग ग्यारह बजे ग्राम बैरिया निवासी प्रकाश पुत्र स्व. भगौती प्रसाद के घर में तेंदुआ घुस आया। बताया जा रहा है कि तेंदुए ने दस फीट ऊंची दीवार फांदकर आंगन में बंधे करीब आठ किलो वजन के बकरे पर हमला कर दिया और उसे मुंह में दबाकर घर के पूरब दिशा स्थित गन्ने के खेत की ओर भाग गया। घर वालों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे और तेंदुए का पीछा भी किया, लेकिन अंधेरे और घने गन्ने का फायदा उठाकर तेंदुआ बकरे को लेकर फरार हो गया। इस घटना से प्रकाश को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। गुरुवार को मासूम की जान ले चुका है तेंदुआ इससे पहले गुरुवार को बाबागंज गांव में तेंदुए ने बुद्धा के बेटे पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया था। मासूम की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया था। घटना की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और गुरुवार को ही गांव के पास स्थित गुरुद्वारा के पास पिंजरा लगा दिया था। लेकिन पिंजरा लगने के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी तेंदुआ उसमें कैद नहीं हो सका। इसी बीच शनिवार रात तेंदुए ने तीसरा हमला कर दिया। खेतों से अब घरों तक पहुंचा आतंक, लोग सहमे ग्राम पंचायत बैरिया, सेमरा, ढखेरवा, कट्ठौहा, ववियारी सहित आसपास के आधा दर्जन गांवों में तेंदुए के हमलों से लोग दहशत में हैं। पहले लोग सिर्फ खेतों और जंगल में जाने से डर रहे थे, लेकिन अब तेंदुआ आबादी में घुसकर घरों को निशाना बना रहा है। महिलाएं और बच्चे शाम होते ही घरों में कैद हो जा रहे हैं। किसान अपनी फसल की रखवाली के लिए रात-दिन खेतों पर नहीं जा पा रहे। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है।ग्रामीणों का सवाल – आखिर जिम्मेदार कौन? घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि एक मासूम की जान जाने के बाद भी विभाग तेंदुए को पकड़ने में नाकाम रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इलाके में और पिंजरे लगाए जाएं और रात में गश्त बढ़ाई जाए। अब सवाल ये उठ रहा है कि जब 48 घंटे में तीन घटनाएं हो चुकी हैं तो आखिर जिम्मेदार कौन है?