निघासन-(खीरी)मंगलवार को नगर के सिंगाही रोड स्थित महात्मा बुद्ध डिग्री कॉलेज प्रांगण के सामने सम्राट अशोक स्तंभ के निर्माण के लिए शिलान्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव आर. एस. कुशवाहा, डॉ. अर्पित कुशवाहा तथा लखनऊ से आए बौद्ध धर्म के विद्वानों ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर शिलान्यास किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर. एस. कुशवाहा ने कहा कि सम्राट अशोक केवल एक महान शासक ही नहीं, बल्कि मानवता, शांति और करुणा के प्रतीक थे। उनके जीवन से समाज को आज भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि सत्ता और वैभव के शिखर पर पहुंचने के बावजूद सम्राट अशोक ने जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और अपना जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने लोगों से सम्राट अशोक के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। भण्डारी यादव ने कहा कि सम्राट अशोक भारतीय इतिहास के सबसे महान शासकों में गिने जाते हैं। मौर्य वंश के इस प्रतापी सम्राट ने अपने शासनकाल में विशाल साम्राज्य की स्थापना की। हालांकि, कलिंग युद्ध में हुए भारी जनसंहार ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। युद्ध की विभीषिका को देखकर उनका हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने हिंसा का मार्ग त्यागकर बौद्ध धर्म को अपनाया। इसके बाद उन्होंने सत्य, अहिंसा, करुणा और मानव कल्याण के सिद्धांतों को अपने शासन की आधारशिला बनाया। डा.अर्पित कुशवाहा ने कहा कि सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में अनेक स्तूपों, विहारों और स्तंभों का निर्माण कराया तथा धर्म, नैतिकता और सामाजिक समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। उनके द्वारा स्थापित अशोक स्तंभ आज भी भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। भारत का राष्ट्रीय चिह्न भी सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के सिंहशीर्ष से लिया गया है, जो उनके आदर्शों और दूरदर्शी सोच की याद दिलाता है।शिलान्यास कार्यक्रम के उपरांत आयोजित भव्य भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता का वातावरण देखने को मिला। इस दौरान डा. निसार अहमद, डॉ. बेनजीर उमर, भंडारी यादव, मनोज वर्मा, पिंटू यादव, जगदीश लोधी, मनमोहन मौर्य, ओपी यादव, उमाशंकर यादव, लेखराम भास्कर, संदीप यादव, पंकज मौर्य, अजय भाष्कर समेत तमाम लोगों ने सम्राट अशोक के आदर्शों पर चलकर समाज में शांति, सद्भाव और मानव सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया।

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