वृक्ष कानून अधिनियम का कठोरता से मौलिक अमल में लाना अत्यंत जरूरी है- सत्यनारायण पांडेय
वृक्षों को कटने से रोकने के लिए अध्यात्म समिति के पदाधिकारी आगे आए हैं समिति के संस्थापक राजकुमार मिश्रा ने वृक्षों के महत्व को तथा उनके काटने से उत्पन्न होने वाले हनी को सबको अवगत करते हुए कहा कि विगत 10-12 वर्षों से भारत सम्पूर्ण विश्व में अंग्रेजी स्थान बनाने जा रहा है। स्वच्छ भारत अभियान में सम्पूर्ण भारत में सफाई ‘का अभियान चल रहा है। जिसमें सड़क के किनारे सैकड़ों ‘वर्ष पुराने पीपल,पाकड़, बरगद गूलर आम चिलबिल और भी कई प्रकार के हरे भरे वृक्ष काट दिए जा रहे हैं जिनसे हमें भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है इससे वातावरण में आक्सीजन की अत्यंत कमी आयी है। इससे अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो रहे है जिनमें चिकनगुनिया,जोड़ों में दर्द, बुखार वं दर्द स्वास से संबंधित कुछ बीमारियांआदि प्रमुख है प्राचीन वृक्षों को काटकर पौधों का रोपण करने से पर्यावरण संतुलित नहीं हो सकता है क्योंकि सैकड़ों पौधे एक साथ मिलकर भी एक वृक्ष की बराबरी नहीं कर सकते,हरे भरे वृक्षों से हमको ऑक्सीजन भरपूर मात्रा मिलती है और पर्यावरण संतुलित रहता है सड़कों के किनारे बृक्ष काटकर, गमले में पौधा लगाने से पर्यावरण को संरक्षण नहीं मिल सकता । सरकार इसकी अवैध कटाई को रोके तथा हाइवे और रोड के दोनों तरफ वृक्षारोपण हेतु भूमिका अधिग्रहण करे ।अन्यथा सड़क के किनारे भवन एवं होटल का निर्माण हो जाने पर वृक्षों का लगाना संभव नहीं हो सोकेगा। सड़कों के किनारे वृक्षों को एक क्रम में पपीता, पाकड़ बरगद गूलर आम, चिलबिल एवं नीम लगाने पर बीच में किसी भी वृक्ष के नष्ट हो जाने पर उसका पता चल जायेगा तथा वृक्षों की गणना ठीक ढंग से हो जायेगी। बृक्षो के कानून का पालन कड़ाई से होना चाहिए,जो लोग सडक के किनारे या कहीं भी अपने निजी स्वार्थ के लिए साजिश के तहत वन विभाग के कर्मचारियों को मिलाकर वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को कटवाते हैं तो उनकी जांच उच्च स्तरीय अधिकारी द्वारा करके कठोर से कठोर कार्रवाई करनी चाहिए जिससे कि वह आगे से ऐसा निंदनीय कृत्य ना कर सके क्योंकि एक हरे भरे वृक्ष लाखों लोगों को को जीवन प्रदान करते हैं और उनका स्वास्थ्य का ख्याल रखते हैं जो व्यक्ति ऐसा कृत करते हैं वे लाखों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हैं, समिति के अध्यक्ष सत्यनारायण पांडे ने कहा कि शुद्ध वायु में श्वास लेना शुद्ध जल को पीना एवं शुद्ध अन्य का भोजन करना यह प्रत्येक प्राणी का मौलिक अधिकार है इस एकमात्र वृक्ष पूरा करता है व्यक्ति साजिश कर हरे -भरे वृक्ष को काटते हैं या कटवाते हैं ऐसे लोगों पर वृक्ष वृक्ष कानून एक्ट के तहत जांच कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।समिति के उपाध्यक्ष कृष्णमोहन त्रिपाठी ने कहा कि सनातन धर्म के अनुसार पहले वृक्षों को देवता के रूप में पूजा जाता था, आज लालच के कारण वृक्षों को काट देते हैं
विकास के मौजूदा मॉडल की विफलता यह कि जीवन के इन तीनों आधारों को प्रदूषण ने लील लिया है। यही वजह है आज देश की आबादी का बड़ा हिस्सा स्वच्छ व सुरक्षित पानी, शौचालय और शुद्ध हवा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से भी वंचित है। पर्यावरण पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। इस दिशा में समाज और सरकार को स्वच्छता और वृक्षारोपण को एक जनान्दोलन बनाने की तरफ सोचना होगा, जिसके लिए समाज की सहभागिता होना पहली और आवश्यक शर्त है। वहीं कुछ लोग निजी स्वार्थ और चंद पैसों की खातिर पेड़ों की बलि चढ़ा रहे हैं। धरती को लगातार बंजर बना रहे हैं।
जनपद में कई जगह अवैध रूप से कटाई चल रही है। जिला प्रशासन और वन विभाग इसे अंजान बना हुआ है। सरकार एक तरफ लगातार लोगों को पौधे लगाने के प्रति जागरूक कर रही है, लेकिन कुछ इलाकों में कुछ और ही देखने को मिल रहा है। बड़े-बड़े पेड़ अवैध रूप से काटे जा रहे हैं। हालांकि लोगों ने इस संबंध में कई बार प्रशासन को बताया। इसके बावजूद प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इस कारण लोगों में प्रशासन के खिलाफ रोष है। हमारी मांग है की है कि जो लोग चोरी छुपे वृक्षों की कटाई करते हैं। उनके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि पर्यावरण बचाया जा सके। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपाध्यक्ष कृष्ण मोहन त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष विजय शंकर मिश्र ,सुश्री अर्पिता मिश्रा ,गौरव पांडे, दयासागर पाठक, संजय तिवारी, अशोक कुमार झा, वीरेंद्र पांडे, नीतीश अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे