अलाव के इर्द-गिर्द लगा रहता है बेजुबान मवेशियों का जमावड़ा
नरैनी/बांदा। कड़ाके की ठंड में गर्म कपड़े पहनने के बावजूद लोग ठंड से ठिठुरते नजर आ रहे हैं। ऐसे में बेजुबान मवेशियों की हालत बहुत खराब है। जगह-जगह पर जलाए जाने वाले अलावों के इर्द-गिर्द मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। अलाव की आंच से बेजुबान भी ठंड से अपना बचाव करते हुए देखे जा रहे हैं।
एक पखवारे से धूप न निकलने और कोहरा एवं घने बादलों के कारण दिन और रात का तापमान लगभग एक समान रहता है। ऐसे में लोगों का जीवन अस्त व्यस्त है। विशेषकर अभावग्रस्त गरीबों और बुजुर्गों तथा पशुओं के जीवन रक्षक इस समय केवल अलाव बने हुए हैं। नगर पंचायत द्वारा सार्वजनिक जगहों में अलाव जलाए जा रहे हैं जहां पर बेसहारा घूम रहे मवेशी भी अलाव के पास खड़े नजर आते हैं। कस्बे में कई लोग अपने दरवाजे अलाव न लगने की भी शिकायत करते हैं। ग्राम पंचायत कटरा कालिंजर के ग्राम प्रधान लगातार ट्रैक्टरों में लादकर जलाऊ लकड़ी अपने गांव में ज्यादातर गरीबों के मोहल्लों तथा सार्वजनिक स्थलों में भेज रहे हैं उनके इस कार्य को सोशल मीडिया में काफी लोकप्रियता हासिल हो रही है। कटरा कालिंजर के ग्राम प्रधान राजेंद्र श्रीवास ने बताया कि अछरौड़ चौराहे सहित तमाम सार्वजनिक स्थलों पर तथा कुछ गरीबों के घरों को मिलाकर कुल 30 जगह अलाव की लकड़ी प्रतिदिन वितरित कराते हैं। बताया कि जिस दिन ठंड ज्यादा बढ़ गई तब से लगातार एक ट्रैक्टर ट्राली लकड़ी प्रतिदिन की खपत अलाव में हो रही है। लगातार एक पखवारा से सूर्य के दर्शन नही हो रहे हैं जिससे गरीब और वृद्ध लोगों की हालत खराब हो गई है। तहसील प्रशासन ने तहसील क्षेत्र में अब तक लगभग तीन हजार कंबल लेखपालों के माध्यम से बटवाये गए हैं जो पर्याप्त से बहुत कम है। अभी भी गरीबो को कम्बलों की दरकार है।