नरैनी रोड स्थित दारूल उलूम रब्बानिया मंे हुआ आयोजन
बांदा। दारुल उलूम रब्बानियां के 14 वा जलसा ए दस्तार बन्दी (दीछांत समारोह) में तक़रीबन 200 तलबा (छात्रो) के उनका कोर्स पूरा होने पर (फाजिल, आलिम, क़ारी, हाफ़िज़) डिग्री (सनद) दी गई उलमा और बुजुर्गों ने उनके सिर पर पगड़ी बांधी और फूलों की माला पहनाई शनिवार की रात नरैनी रोड स्थित जामिया रब्बानिया के सजे धजे मैदान (ग्राउन्ड) मे जलसा हुआ मदरसे के छात्रो ने हिन्दी, अंग्रेज़ी, ऊर्दू, अरबी, फारसी, बंगला व बुंदेलखंडी भाषाओं में तकरीर (सम्बोधन) की मौलाना शोएब आसवी साहब इलाहाबाद ने अपनी तकरीर में कहा कि अल्लाह तआला ने कुरआन में पहले नूर फिर किताब का ज़िक्र फ़रमाया इसलिए कि किताब पढ़ने के लिए नूर का होना जरूरी है इसका मतलब यह है कि पहले सीने को इश्क नबी से मुनव्वर कर लो फ़िर कुरआन पढ़ो ताकि किताब सही समझ में आ जाए।
मौलाना हाशिम अशरफी साहब कानपुर ने कहा ऐ लोगो जिहालत वाली मन्नते न मांगो अगर मन्नत मांगना है तो मांगो कि अगर बेटा हुआ तो उसे आलिम या हाफ़िज़ बनाउगा या ये मन्नत मांगो कि मै नाफिल नमाज़ पढ़ूगा या नफिल रोजा रखूगा।जलसे में अब्दुल वकील (मुबारकपुरी) और संदल जलालपुरी वा कई शायरो ने नातिया कलाम पेश किया और कई बड़े प्रसिद्ध उलमा व मशायख किराम ने बयानात किए जलसे की सदारत हज़रत अल्लामा सैय्यद खुशतर रब्बानी साहब (सदरे आला) जामिया रब्बानिया ने की कयादत हज़रत मौलाना सैय्यद अनवर रब्बानी साहब (मोहतमिम आला) व हज़रत मौलाना सैय्यद शाहिद रब्बानी साहब (नाजिमे आला) मौलाना सैय्यद मेराज मसूदी (अकील मिया) शहर क़ाज़ी (नायब सदरे आला) ने की निज़ामत हज़रत मौलाना सैय्यद राशिद रब्बानी (प्रबंधक) एव हज़रत मौलाना सैय्यद अबरार अहमद साहब (हामिद मिया) प्रिंसपल जामिया रब्बानिया व मौलाना मुफ्ती सैय्यद गौहर रब्बानी साहब ने की।जलसे में सभी शिक्षक गण एवं समस्त कर्मचारी व प्रबंध समिति के सदस्य गण उपस्थित रहे जलसे में उत्तर प्रदेश बिहार बंगाल व बुंदेलखंड से भारी संख्या में लोग शरीक हुए।मदरसे से दस्तार पाने वाले फजीलत व आलिम के छात्रों को एक बैग के साथ एक सेट बहारे शरीयत मौलवी के छात्रों को एक बैग के साथ एक सेट कानूने शरीअत व हिफ्ज के छात्रों को एक बैग के साथ एक सेट कानूने शरीअत एक कुरान शरीफ क़िरअत के छात्रों को एक बैग के साथ क़िरअत का एक सेट मुकम्मल कोर्स दिया गया ।बाहर से आने वाले तमाम लोगों को व मदरसे के तमाम छात्रों को अमीर शोबए तबलीग मौलाना सैयद आबिद रब्बानी साहब की तरफ से उपहार स्वरूप दिया गया।