निघासन नगर पंचायत के पास गाँव में मांस-मछली की करीब 100 दुकानें सड़कों और चौक-चौराहों बाजार में सजी हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि किसी भी दुकान के पास मांस काटने और बेचने का लाइसेंस नहीं है। बावजूद शहर में खुलेआम बकरे और मुर्गे कट रहे हैं। निघासन व पास की बाजार जैसे रकेहटी बाजार,लुधौरी बाजार,झण्डी बाजार,ढखेरवा बाजार,दुबहा बाजार,बम्भहनपुर बाजार,तारा नगर बाजार, मुड़ा बाजार,सिंगाही बाजार,सिसैया बाजार,पढुआ बाजार,आदि कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर खुलेआम सड़कों पर मांस बेचा जा रहा है। इन दुकानों पर मांस को बिना ढके बेचा जाता है, जिन पर मक्खियां भिनभिनाती रहती है। हैरत की बात यह है कि कुछ दुकानदार अस्वस्थ बकरे और मुर्गे भी काट कर लोगों में बीमारी परोस रहे हैं। साफ-सफाई के अभाव में तेज दुर्गंध निकलती है। लेकिन दुकानों के संचालकों पर कोई असर नहीं पड़ता है।
मुर्गा की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। जिससे आम लोगों की सेहत को खतरे में डाला जा रहा है।जिससे अधिकारियों ने अनदेखा कर रखा हैं। निघासन सफ्ताहिक बाजार में खुले में मीट-मुर्गा, मछली की बिक्री हो रही है। लोगों ने कहा कि मछली व मांस विक्रेता द्वारा निकला कचरा भी वहीं फेंक दिया जाता है। जिससे निकलने वाली बदबू से लोगों को परेशानी हो रही है। लोग नाक बंद करके दुकानों के सामने से गुजरने को विवश रहते हैं।बकरे को काटने से पहले करनी होती है जांच बिना जांच किये काट कर बेचा जाता है।मास।ग्राहकों को साफ सुथरी, ताजा व स्वस्थ्य मुर्गा व बकरे की मांस उपलब्ध हो इसके लिए पशुपालन विभाग के एक डॉक्टर को यह जिम्मेदारी दी जाती है। कि वह मीट कारोबारियाें से मिलकर मीट के लिए लाए गए बकरों के स्वास्थ्य की जांच करेंगे। इस दौरान देखेंगे कि बकरा बीमार तो नहीं है। बकरों के मेडिकल जांच व डॉक्टरी सर्टिफिकेट प्रदान करने के बाद ही बकरे के मांस को बाजार में बेचा जा सकता है।

अवैधे मांस की बिक्री पर प्रतिबंध है। कारोबार करने वालों के पास एक कमरा होना चाहिए, जिसमें मांस का उत्पादन व बिक्री की अलग-अलग जगह निर्धारित हो। वध किए जाने वाले बकरे का स्वस्थ रहना सबसे अहम है। पशु चिकित्सा विभाग, नगर परिषद और पुलिस को कार्रवाई की शक्तियां है।फूड इंस्पेक्टर भी नही पहुंच रहे बाजार क्षेत्र में बना हुआ चर्चा का विषय। क्यों नहीं हो रही कार्रवाई बिना लाइसेंस के चला रहे हैं दर्जनों से ज्यादा निघासन में दुकाने।