– झालरों की रोशनी से जगमगाया शहर
– मिठाईयों की दुकानों उमड़ रही जमकर भीड़
बांदा। दीवाली में आतिशबाजी न हो तो सब कुछ फीका लगता है। प्रकाश पर्व के लिए इस बार भी शहर के जीआईसी मैदान में पूरे सुरक्षा इंतजामों के बीच आतिशबाजी की दुकानें सज गई हैं। करीब आधा सैकड़ा से अधिक आतिशबाजों ने बाजार में अपनी अपनी दुकानें सजा ली हैं और ग्राहकों को लुभाने में जुट गए हैं। अबकी बार ग्रीन पटाखों की ज्यादा ही भरमार है। देश की राजनीति में राफेल और सीबीआई का दम अब पटाखा बाजार को भी गरम कर रहा है। बाजार में राफेल राकेट और सीबीआई बम प्रमुख आकर्षण में शामिल हैं। रविवार से ही लोगों ने पटाखों की खरीदारी शुरू कर दी है। हालांकि पिछले कुछ सालों से चाइनीज उत्पादों से ग्राहकों की दूरी देशी पटाखों के लिए राहत की बात है, लेकिन अपनी कम कीमत की वजह से अभी भी चाइनीज बाजार का दम देखने को मिल रहा है। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से बाजार में फायर बिग्रेड विभाग द्वारा कैम्प लगाया गया है। जहां समय समय पर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया जा रहा है।
सोमवार की रात दीवाली के मौके पर करोड़ों रुपए की आतिशबाजी की धूम-धड़ाम के बीच जनपदवासी प्रकाश पर्व मनाएंगे। जिसके लिये बाजार में तरह तरह के देशी और विदेशी पटाखे उपलब्ध है। पटाखों की कीमत पहले की तुलना में कुछ ज्यादा है। लेकिन दीवाली के मौके पर लोग कीमत का परवाह किये बगैर ही पटाखों की खरीदारी कर रहे है। जबकि पिछले वर्ष करीब बीस फीसदी लोगों ने ही चाइनीज पटाखे खरीदे थे। बताया कि देश की राजनीति का असर पटाखा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। इस बार राफेल और सीबीआई के नाम से आतिशबाजी का सामान आ गया है। इस बार ग्रीन पटाखों की ज्यादा ही बिक्री हो रही हैै। राफेल राकेट और सीबीआई बम ग्राहकों को खासा लुभा रहे हैं। पटाखा बाजार में इस बार दस रुपए से लेकर करीब दस हजार रुपए तक की कीमत के पटाखे बिक रहे हैं। हालांकि महंगाई डायन की मार से पटाखा बाजार भी अछूता नहीं रहा और यहां भी महंगाई का रंग खूब देखने को मिल रहा है।शहर के राजकीय इंटर कालेज ग्राउंड में लगी पटाखा बाजार पर रौनक रही। गांव और शहर से आए लोग सुबह से ही बाजार पर जा धमके। सीको, फुलझडी, महताब, शैरा, राकेट और आसमान पर सतरंगी छटा फैलाने वाले राकेट लोगों को पसंद आए। हालांकि हर बार अपनी कम कीमतों को लेकर चर्चा में रहने वाले चाइनीज पटाखे लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। हालांकि पिछले वर्षों में चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार के चलते कीमत पर आकर्षित होने वाले लोग ही इस ओर रुख कर रहे हैं। दुकानदार बताते हैं कि लोग इस बार आवाज करने वाले पटाखों से तौबा कर रहे हैं। इसके पीछे आवाज वाले पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को कारण माना जा रहा है। तेज अवाज की बजाय रंग बिरंगी रोशनी बिखेरने वाले पटाखे ही खरीदे जा रहे हैं। इस बार पैराशूट राकेट और थ्रीडी पटाखों की भी धूम रही। जीआईसी मैदान में पटाखों की बिक्री के लिये सजाई गई दुकानों के साथ अग्निशमन और पुलिस विभाग ने भी अपना कैम्प स्थापित कर रखा है। दमकल के कैंप में एक उपनिरीक्षक, एक हेड और आधा दर्जन जवान तैनात हैं। वहीं कोतवाली पुलिस की ओर से एक उपनिरीक्षक व चार सिपाही मौजूद रहे। सभी पटाखा दुकानों में सीज फायर आदि स्थापित करवाने के साथ साथ धूम्रपान करने वालों पर पूरी नजर रखी जा रही है। समय समय पर दुकानदारों को दिशा निर्देश दिये जा रहे है। इसके अलावा पटाखा बाजार में पानी के टैंकर और बालूभरी बोरियां समेत अन्य उपकरणों को तैयार रखा गया है। जिससे किसी भी प्रकार की दुघटना पर काबू पाया जा सके। पटाखा दुकानदारों ने भी अग्निशमन विभाग द्वारा किये जा रहे सहयोग की सराहना की है। जीआईसी मैदान में लगाये गये पटाखा बाजार में वैसे तो शनिवार भी मामूली रूप से पटाखों की बिक्री हुई। लेकिन गुरूवार को दीपावली के मौके पर पटाखा बाजार में जमकर बिक्री होने की संभावना है। पटाखा दुकानदारों की माने तो दीपावली के दिन दोपहर बाद से देर रात तक पटाखा खरीदने वालों की जमकर भीड़ रहेगी। इसको देखते हुये पटाखा व्यापारियों ने अपनी अपनी दुकानों में कई लोगों को तैनात कर रखा है। जिससे खरीदारों को किसी तरह की दिक्कतों का सामना नही करना पड़े।
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पिछले साल से इस बार महंगा बिक रहे पटाखे
बांदा। ग्रीन फुलझड़ी 800 रुपये यूनिट यानि 80 रुपये डब्बा, राकेट 180 रुपये पैकेट, चक्करघिन्नि यानि राधा चक्कर 180 से 250 रुपये डब्बा, तथा सदाबाहार नागिन छाप 17 रुपये पाकेट बिक रहा है। पिछले साल से इसबार सभी पटाखों पर महंगाई है। बिक्री भी फिलहाल कम ही है, दिपावली व छठ पर इसमें अचानक उछाल आएगा। पटाखे व्यवसाय राजू त्रिपाठी का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक प्रतिवर्ष सिर्फ दीपावली में पांच करोड़ के पटाखे का कारोबार सीतामढ़ी जिले में होता है। इसके अलावा लग्न के मौसम में भी पटाखे का कारोबार इससे कहीं ज्यादा होता है। शादी-समारोह में पैशन और फैशन के नाम पर आतिशबाजी स्टेटस सिबाल के तौर पर होती है।अमन गुप्ता का कहना है कि इस बार पटाखा बनाने वाली कंपनियों ने ग्रीन पटाखें सप्लाई की हैं। चीन-भारत की तनातनी के बीच लोग चाइनिज पटाखों का बहिष्कार है ज्यादातर पटाखे दूसरे राज्यों से आए हैं और वे देसी है। शुरुआती खरीदी में लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं। इस दिवाली 40 प्रतिशत ग्रीन पटाखें फूटने का अनुमान है।
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सिर्फ दिवाली पर पांच करोड़ के कारोबार का अनुमान
बांदा। दीपावली एकबार पटाखा बाजार गुलजार है। फुटपाथ के साथ जहां-तहां दुकानें सजी हुई जीआईसी मैदान में एक से बढ़कर एक पटाखे देखने को मिल रहे हैं। ग्रीन फुलझड़ी से लेकर राकेट व तेज आवाज वाले बम, चकरघिन्नी भी है। गांव-शहर के तमाम कारोबारियों को सिर्फ दीपावली जिलेभर में कम से कम पांच करोड़ की बिक्री का अनुमान है।
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जीआईसी ग्राउंड में सज गईं पटाखा की दुकानें
बांदा। जीआईसी ग्राउंड में अबकी बार भी पटाखा बिक्री की दुकानें सजाई गई हैं। इसके लिए बाकायदा लाइसेंस भी लिया गया है। पटाखा बाजार में बच्चों की फुलझड़ी से लेकर बेहतरीन पटाखे बिक्री के लिए सजाए गए हैं। लेकिन अबकी बार महंगाई की वजह से खरीददार अपना हाथ सिकोड़ते नजर आ रहे हैं। बुधवार से ही पटाखा बाजार में बिक्री का सिलसिला शुरू हो गया है। धनतेरस पर पूजन अर्चन के बाद लोगों ने आतिशबाजी की।
शहर के जीआईसी ग्राउंड में पिछली बार की तरह अबकी बार भी पटाखा बिक्री के लिए दुकानें लगाई गई हैं। इसके लिए बाकायदा अग्निशमन विभाग से लाइसेंस भी लिए गए हैं। तकरीबन चार दिन पहले से ही पटाखा बाजार सजाए जाने को लेकर दुकानों की शिफ्टिंग शुरू हो गई थी। धनतेरस पर्व के पहले ही पटाखा बिक्री की दुकानें सजाई गई हैं। पटाखा बाजार में बच्चों की फुलझड़ी से लेकर बेहतरीन धमाकेदार पटाखों की भरमार है। धनतेरस पर्व के मौके पर बुधवार को पटाखा बाजार में भी जमकर खरीददारी हुई।