– रोडवेज की बसें हो रही खाली
– रोडवेज कर्मचारी संघ ने आयुक्त को सौंपा पत्र, कार्रवाई की मांग
बांदा। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें राष्ट्रीयकृत मार्गों पर यात्रियों के अभाव से जूझ रही हैं, जबकि इन्हीं मार्गों पर बिना परमिट के चल रहे डग्गामार वाहन खुलेआम सवारियां ढो रहे हैं। निगम की आय पर असर पड़ने के साथ ही शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। इस संबंध में उ.प्र. रोडवेज कर्मचारी संघ, चित्रकूटधाम क्षेत्र-बांदा ने आयुक्त चित्रकूटधाम मण्डल को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। संघ के क्षेत्रीय मंत्री ने पत्र में बताया कि परिवहन निगम उत्तर प्रदेश सरकार का उपक्रम है, जो तय समय सारिणी के अनुसार जनता को सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध कराता है। निगम प्रति बस औसतन ₹25,000 मासिक कर शासन को जमा करता है। इसके बावजूद राष्ट्रीयकृत मार्गों पर बिना परमिट के निजी वाहन चल रहे हैं, जो प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से संचालन कर रहे हैं।
पत्र में कहा गया है कि ये प्राइवेट वाहन न तो किराया नियमों का पालन करते हैं और न ही गति सीमा का। कई वाहन ओवरलोड होकर चलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। वहीं, निगम की बसें यात्रियों के अभाव में चलाने तक का खर्च नहीं निकाल पा रहीं। संघ ने बताया कि मोटर एक्ट 2015 के तहत सभी बसों से लगेज कैरियर हटाने का निर्देश था, लेकिन प्राइवेट बसों में आज भी लगे हुए हैं। इतना ही नहीं, बिना बिल के करोड़ों रुपये का माल रोज इन बसों से लाया-लेजाया जा रहा है। इससे न केवल निगम को नुकसान हो रहा है, बल्कि कर चोरी भी बढ़ रही है। बांदा से पन्ना, सतना, फतेहपुर और कानपुर मार्गों पर दर्जनों डग्गामार वाहन सुबह से रात तक संचालित हैं। वहीं, कई बोलेरो और कैंपर गाड़ियों में अखबार के नाम पर यात्रियों को भरकर ले जाया जाता है। निगम कर्मचारियों का आरोप है कि जब निगम बसें सवारियां उठाती हैं तो उनका चालान तक कर दिया जाता है, लेकिन अवैध वाहन खुलेआम सड़क पर खड़े रहते हैं। संघ ने आयुक्त से मांग की है कि प्रशासन व परिवहन विभाग मिलकर राष्ट्रीयकृत मार्गों से अवैध वाहनों को हटवाएं, ताकि रोडवेज की बसें पुनः यात्रियों से भर सकें और शासन को हो रही राजस्व हानि रुके।