बांदा। स्वास्थ्य विभाग और निजी चिकित्सा केंद्रों में ’जांच के नाम पर लूट’ से कमीशन का खेल डाक्टरों और लैब के बीच 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक के मोटा कमीशन का नेटवर्क चल रहा है। जिसके कारण 1,100 में होने वाली जांच के लिए मरीजों से 7,000 तक वसूले जा रहे हैं।
अनावश्यक टेस्ट करवा कई अस्पतालों में मरीजों को बिना जरूरत के महंगे और बार-बार मेडिकल टेस्ट लिखे जाते हैं।जनपद सहित विभिन्न इलाकों में जांच के नाम पर खुलेआम मरीजों को लूट का शिकार होना पड़ रहा । इस घिनौने कार्य में स्वास्थ विभाग भी कमीशन लेकर मूक बना हुआ है। चिकित्सा के नाम पर बांदा में मौजूद जांच सेन्टर खुलेआम लोगो को लूट रहे है।खासकर मेडिकल कालेज के बाहर मौजूद जांच सेंटर।मेडिकल कालेज और चिकित्सा स्टॉफ खुलेआम अपना निर्धारित कमीशन लेकर मरीजों को लुटवाने का काम कार्य है।यह खेल काफी समय से जारी है।बता दे कि आम तौर पर जनपद मुख्यालय सहित कस्बा क्षेत्र में अवैध जांच सेंटर कुकुरमुत्तों की तरह खुले हुए है। स्वास्थ विभाग के पास कोई उनका आकड़ा भी नहीं।कही न कही कमीशन के अंधे खेल के पीछे आखिर खुली छूट किसने दे रखी है ।अब आज के चिकित्सा दौर में पहले चिकित्सक जांच ही पर्चे में लिखता है।फिर इसके बाद वह दवा लिखता है।कमीशन का खेल दोनों स्तर पर खुलेआम चल रहा है।
अनावश्यक टेस्ट करवा कई अस्पतालों में मरीजों को बिना जरूरत के महंगे और बार-बार मेडिकल टेस्ट लिखे जाते हैं।जनपद सहित विभिन्न इलाकों में जांच के नाम पर खुलेआम मरीजों को लूट का शिकार होना पड़ रहा । इस घिनौने कार्य में स्वास्थ विभाग भी कमीशन लेकर मूक बना हुआ है। चिकित्सा के नाम पर बांदा में मौजूद जांच सेन्टर खुलेआम लोगो को लूट रहे है।खासकर मेडिकल कालेज के बाहर मौजूद जांच सेंटर।मेडिकल कालेज और चिकित्सा स्टॉफ खुलेआम अपना निर्धारित कमीशन लेकर मरीजों को लुटवाने का काम कार्य है।यह खेल काफी समय से जारी है।बता दे कि आम तौर पर जनपद मुख्यालय सहित कस्बा क्षेत्र में अवैध जांच सेंटर कुकुरमुत्तों की तरह खुले हुए है। स्वास्थ विभाग के पास कोई उनका आकड़ा भी नहीं।कही न कही कमीशन के अंधे खेल के पीछे आखिर खुली छूट किसने दे रखी है ।अब आज के चिकित्सा दौर में पहले चिकित्सक जांच ही पर्चे में लिखता है।फिर इसके बाद वह दवा लिखता है।कमीशन का खेल दोनों स्तर पर खुलेआम चल रहा है।