वाराणसी। राम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास द्वारा आरंभ श्रीकृष्ण लीला में शुक्रवार की शाम नाग नथैया लीला होगी। प्रातःकाल पांच बजे संकट मोचन मंदिर परिसर स्थित कदंब वन से डाल काटी गई। भक्त उसे अपने कंधों पर उठाकर संकट मोचन मंदिर से तुलसी घाट तक ले आए। यहां डाल का पूजन करने के बाद उसे नियत स्थान पर लगा दिया गया। शुक्रवार की शाम 4:40 पर भगवान कृष्णा गंगा रूपी यमुना में छलांग लगाएंगे और नागनथैया की ऐतिहासिक लीला होगी। नागनथैया की 10 मिनट की लीला में भगवान श्रीकृषण यमुना में कालिया नाग का दमन करते हैं जिस स्थान पर कदम का पेड़ लगाया जाता है, वह पेड़ घाट पर बने मां गंगा के मंदिर के ठीक सामने लगाया जाता है। कालिया दमन का प्रसंग नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश देता है। अब से 4 शताब्दी से भी ज्यादा समय पहले जब गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने काशी में श्रीकृष्ण लीला का शुभारंभ किया था उस वक्त निःसंदेह उनके मन में भी नदियों के निर्मलीकरण का ही भाव रहा होगा। हमारी नदियां प्रकृति द्वारा मिले अनमोल रत्न है। इनको सहेजने की जरूरत है। नहीं तो नदियां समाप्त हो जाएंगी आज गंगा, यमुना, कावेरी, नर्मदा आदि नदियां प्रदूषण से कराह रही हैं। सरस्वती नदी तो लुप्त प्राय ही हो गई हैं। आज जरूरत है प्रकृति द्वारा मिले इन अनमोल रत्नों को बचाने की, नहीं तो आने वाला कल हमारे लिए विनाशकारी होगा। अगर आज जल नहीं बचेगा तो हमारा कल भी नहीं होगा। हमारा भविष्य अंधकार में हो जाएगा क्योंकि जल ही जीवन है।

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