फाइलेरिया से बचाव के लिए जनपद के 20.86 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य
बंादा। 10 फरवरी से जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के तहत एमडीए की दवा खिलाई जाएगी। जिले की 20.86 लाख आबादी को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (सर्वजन दवा वितरण) एमडीए कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बुधवार को विकासभवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) वेद प्रकाश मौर्या की अध्यक्षता में अंतर्विभागीय जिला समन्वय समिति की द्वितीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया कि 10 से 28 फरवरी तक प्रस्तावित एमडीए अभियान के दौरान प्रत्येक घर पर जाकर आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कार्यकर्ता परिवार के हर सदस्य को अपने सामने दवा खिलाएं ।
उन्होंने कहा कि एमडीए-राउंड की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य विभागों को भी सहयोग करने की जरूरत है। शिक्षा विभाग एवं पंचायती राज को एमडीए राउंड में विशेष सहयोग करने की अपील की। सीडीओ ने कहा की समुदाय को बताया जाए कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है। इससे बचाव के लिए पांच साल तक लगातार साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन अनिवार्य है । यह दवा खाली पेट नहीं खानी है। दो वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को (गर्भवती और अति गंभीर बीमार लोगों को छोड़ कर) दवा खानी है । एमडीए अभियान में एक से दो वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को भी पेट के कीड़े मारने की दवा खिलाई जाएगी ।जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने एमडीए अभियान के बारे में प्रस्तुति दी, जिस पर सीडीओ ने निर्देशित किया कि सुनिश्चित होना चाहिए कि लाभार्थी आशा कार्यकर्ता के सामने ही दवा खाएं । कोई भी आशा कार्यकर्ता किसी लाभार्थी को दवा देकर नहीं आएंगी । उन्होंने जिले में इस समय संचालित अभियानों में जिले की रैकिंग बेहतर बनाये रखने के लिए टीम भावना से कार्य करने को कहा । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.अनिल कुमार श्रीवास्तव ने लोगों से अपील किया है कि जब ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर (दवा सेवन कराने वाले स्वास्थ्य कर्मी) उनके घर जाएं तो वह उनके सामने ही दवा खाएं, जिससे कार्यक्रम को सफल बनाया जा सके। मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम जनपद के समस्त ब्लॉक सहित शहरी क्षेत्र संचालित किया जाएगा। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया पिछले वर्ष चले एमडीए राउंड में 87.8 प्रतिशत आबादी को दवा का सेवन करवाया गया था जबकि प्रदेश में 85 प्रतिशत लोगों ने दवा का सेवन किया था। बताया की इस बार एमडीए अभियान में कुल 1814 टीम कार्य करेंगी और 300 पर्यवेक्षक भी लगाये गये हैं। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अनिल कुमार श्रीवास्तव, संचारी रोगों के नोडल अधिकारी डॉ मुकेश पहाड़ी, जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार, सहायक मलेरिया अधिकारी विजय बहादुर एवं स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी, सहयोगी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं सहयोगी संस्था सीफार, पाथ और पीसीआई के जिला प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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क्या है फाइलेरिया के लक्षण
बांदा। फाइलेरिया एक विशेष प्रकार के क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। सामान्य दिखने वाले संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद वहीं मच्छर अगर स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो स्वस्थ व्यक्ति के भी संक्रमित होने की आशंका रहती है। सामान्यतरू इसे हाथी पांव के नाम से जाता है। इसमें शरीर के किसी भी अंग में पैर, हाथ, अंडकोश में सूजन आ जाती है, बाद में इसमें जख्म हो जाते हैं। किसी भी व्यक्ति के संक्रमित होने के बाद बीमारी होने में पांच से 15 साल तक लग सकते हैं। इससे बचाव के लिए एमडीए के दौरान दवा का सेवन करें, व सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें। घर के आस-पास गंदा पानी जमा न होने दें।