वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में अन्न और वैभव प्रदान करने वाली मां अन्नपूर्णा का अन्नक्षेत्र अब वृहद हो गया है। मां अन्नपूर्णा के दरबार में श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन मिलता है और छात्रों को निःशुल्क शिक्षा। सोमवार को अन्नक्षेत्र की रजत जयंती समारोह है और रजत जयंती वर्ष में माता अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र की ओर से गरीबों और असहायों के लिए निःशुल्क भोजन व्यवस्था की गई है मां अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी महाराज ने बताया काशी अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र अपनी रजत जयंती वर्ष में गरीबों और असहायों तक मां अन्नपूर्णा का प्रसाद पहुंचाएगा। सोमवार को रात्रि 11 से 2 बजे तक शहर के विभिन्न स्थानों पर अन्नक्षेत्र की ओर से भोजन का इंतजाम किया जाएगा। काशी आने वाले साधु-संन्यासियों की सेवा के लिए बांसफाटक में नया भवन लिया गया है। इसमें रोजाना 20 हजार लोग भोजन करते हैं। भोजन अन्नदान योजना के विस्तार के लिए काशी अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना एक जुलाई 1999 को हुई। इसके तहत रोजाना सुबह 7:30 बजे से रात 10:30 बजे तक निःशुल्क जलपान एवं भोजन की व्यवस्था की गई। वर्तमान में रोजाना 20 हजार लोग यहां भोजन करते हैं। महंत शंकरपुरी ने बताया कि बालाजी बाजीराव पेशवा ने 1725 में मंदिर की स्थापना की थी। मंदिर के महंत की अध्यक्षता में 2 अक्तूबर 1997 को श्री अन्नपूर्णा फ्री फूड चैरिटेबल सोसायटी का गठन किया गया। इसमें गरीब, वेदपाठशाला विद्यार्थी साधु-संत और दर्शनार्थियों के लिए माँ अन्नपूर्णा देवी का प्रसाद निशुल्क भोजन के रूप में शिक्षा दी जा रही है।

वहीं निःशुल्क वेद विद्या एवं संस्कृत शिक्षा की शुरुआत 25 छात्रों से 1999 में हुई थी। वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 350 गरीब छात्रों को नियमित रूप से मुफ्त सुविधाओं के साथ आधुनिक कंप्यूटर की शिक्षा के साथ वेद की शिक्षा दी जा रही है।

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