जनपद मुख्यालय से सटे अछरौंड़ गांव के हैं मूल निवासी
बांदा। आगामी 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने काशी विद्वत परिषद के महामंत्री व प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी को भी निमंत्रण पत्रिका भेजकर आमंत्रण दिया है। जैसा कि सभी जानते हैं कि बांदा जनपद के रहने वाले काशी विद्वत परिषद के महामंत्री व प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी अयोध्या के श्रीराम मंदिर के शिलान्यास व आधारशिला कार्यक्रम मे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पूजन करवाने में भी प्रमुख पंडितों मे एक रहे हैं। निमंत्रण पत्रिका आने के बाद जनपद सहित उनके पैतृक गांव में अलग ही उत्साह देखा जा रहा है। अयोध्या में बांदा का गौरव बढ़ाने वाले रामनारायण का जन्म जनपद मुख्यालय से सटे अछरौड़ गांव में हुआ था। पिता का नाम शिवनाथ प्रसाद द्विवेदी माता रामप्यारी द्विवेदी हैं। प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी की प्राथमिक शिक्षा अछरौड़ में ही हुई। सन 1992 में वह काशी अध्ययन के लिए आ गये। आपने संस्कृत वांड्मय का अध्ययन करके भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सनातन संस्कृति में अनेक मानविदन्दुओ को स्थापित कर बांदा का मान बढ़ाया है। संस्कृत साहित्य शास्त्र संरक्षण के क्षेत्र में वैदिक सनातन परंपरा के संवर्धन में अत्यंत प्राचीन संस्था श्री काशी विद्वत परिषद् के महामंत्री का दायित्व आपके पास है, उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति के महामंत्री का दायित्व भी है। वर्तमान में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय व्याकरण विभाग के अध्यक्ष भी हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ एवं दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय सहित अनेक विश्वविद्यालयों में एकेडमिक काउंसिल सदस्य है। शिक्षा साहित्य और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए कर्नाटक के राज्यपाल गुजरात के राज्यपाल जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के द्वारा सम्मानित किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया। वहीं भारत महामहिम राष्ट्रपति द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। काशी विश्वनाथ धाम कारिडोर के विकास में मंदिरों मूर्तियो को शास्त्रों अनुसार संरक्षित करने के लिए सरकार को मार्गदर्शन की भूमिका में रहे रामजन्म भूमि पूजन का मार्गदर्शन आपने किया। अभी रामजन्म भूमि प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में काशी विद्वत परिषद साक्षी, मार्गदर्शन की भूमिका में हैं। आप समय-समय पर सनातन संस्कृति के लिए शास्त्रार्थ संगोष्ठी के माध्यम से सनातन विधोरियों तथा कम्युनिस्टो को चुनौती दी है।

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