ग्राम रीवन में यूपीीडा (UPIDA) इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर प्रशासन की ओर से प्रभावित किसानों के साथ खुली बैठक आयोजित की गई। बैठक में मौदहा के उपजिलाधिकारी महोदय ने किसानों से सीधे वार्ता की और उनकी समस्याओं, शिकायतों तथा भूमि से जुड़े विभिन्न विषयों को गंभीरता से सुना। इस दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।
प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर क्षेत्र में भूमि संबंधी विषय महत्वपूर्ण बने हुए हैं। इसी क्रम में ग्राम रीवन में आयोजित इस खुली बैठक के माध्यम से प्रशासन ने प्रभावित किसानों के साथ संवाद स्थापित किया। बैठक में किसानों को अपनी बात रखने का अवसर मिला और उनकी समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
उपजिलाधिकारी महोदय मौदहा ने बैठक के दौरान किसानों की बात सुनी। वहीं, राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में प्रस्तावित भूमि से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई। खुली बैठक का उद्देश्य प्रभावित किसानों की स्थिति को समझना, उनकी समस्याओं को सुनना और भूमि संबंधी मामलों पर संवाद के माध्यम से जानकारी प्राप्त करना रहा।
राजस्व विभाग के अधिकारी रहे मौजूद
ग्राम रीवन में आयोजित इस बैठक में उपजिलाधिकारी महोदय मौदहा, नायब तहसीलदार महोदय, राजस्व निरीक्षक महोदय सहित संबंधित क्षेत्रों के लेखपाल मौजूद रहे। इनमें रीवन के लेखपाल अनुराग ओमर, करहिया के लेखपाल रमाकांत, खंडेह के लेखपाल प्रवीण तथा उमरी के लेखपाल दिलीप शामिल रहे। अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मौजूदगी में प्रभावित किसानों के साथ बातचीत की गई और उनकी समस्याओं को सुना गया।
किसानों की समस्याएं सुनने पर रहा जोर
यूपीीडा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित भूमि के संबंध में आयोजित इस बैठक को प्रभावित किसानों और प्रशासन के बीच संवाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे मामलों में किसानों की समस्याओं को सुनना और भूमि से जुड़े विषयों पर स्पष्ट जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है। बैठक में अधिकारियों ने किसानों की बातों को सुना तथा संबंधित विषयों पर चर्चा की।
हालांकि, बैठक में किसानों की ओर से उठाए गए विशिष्ट मुद्दों, प्रस्तावित भूमि के रकबे, मुआवजे की दर तथा आगे की प्रशासनिक कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
फिलहाल ग्राम रीवन में आयोजित इस खुली बैठक के माध्यम से यूपीीडा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर प्रभावित किसानों और प्रशासन के बीच सीधा सं
वाद हुआ।