बांदा। बांदा-टांडा नेशनल हाईवे पर लगातार हो रहे हादसों ने स्थानीय लोगों और आसपास के गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। तेज रफ्तार वाहनों के साथ हाईवे के किनारे खड़े खराब ट्रक, सड़क की लेन में खड़े भारी वाहन और आरटीओ द्वारा सीज किए गए वाहनों की लंबी कतारें अब हादसों को न्योता देती नजर आ रही हैं। हालात यह हैं कि स्थानीय लोग इस मार्ग पर सफर करने में भी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।हाल के दिनों में तिंदवारी क्षेत्र में हाईवे पर हुए हादसों ने चिंता और बढ़ा दी है। 20 सितंबर को माटा गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से एक बुजुर्ग किसान की मौत के बाद ग्रामीणों ने हाईवे पर जाम लगाकर स्पीड ब्रेकर की मांग की थी। इससे पहले फरवरी में सेमरी नाला पुल के पास डंपर और एंबुलेंस की टक्कर में महिला की मौत हुई थी। हादसे के बाद करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लगा था।हाईवे की स्थिति की पड़ताल में बांदा से बेंदा घाट तक कई स्थानों पर सड़क किनारे भारी वाहनों के खड़े होने की समस्या सामने आई है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के आसपास, मुंगुस गांव से पहले होटल-ढाबों के पास और तिंदवारी कस्बे में शिव शक्ति ट्रेडर्स के सामने आरटीओ विभाग द्वारा सीज किए गए वाहनों की लंबी कतारें हाईवे की एक लेन के हिस्से पर कब्जा किए रहती हैं।इसके अलावा कई स्थानों पर खराब होने वाले ट्रक चालक वाहन को हाईवे के किनारे ही खड़ा कर देते हैं। रात के समय अंधेरे में इन वाहनों की मौजूदगी दूर से स्पष्ट नहीं होती। यदि वाहन में पर्याप्त रिफ्लेक्टर, पार्किंग लाइट या चेतावनी संकेत नहीं है तो पीछे से आने वाले तेज रफ्तार वाहनों के लिए स्थिति और खतरनाक हो जाती है।